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DRDO की बड़ी उड़ान: मेक इन इंडिया ड्रोन मिसाइल ULPGM-V3 का सफल परीक्षण, हवा और सतह दोनों पर अचूक निशाना

By Lava PandayEdited By: Shashank Baranwal
Published: Thu, 21 May 2026 11:59 AM (IST)

डीआरडीओ ने कुरनूल में मानव रहित हवाई वाहन (यूएवी) से प्रेसिजन गाइडेड मिसाइल (ULPGM-v3) के हवा-से-सतह और हवा-से-हवा दोनों मोड में विकास परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे किए।

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लावा पाण्डेय, बालेश्वर। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ ) ने आंध्र प्रदेश के कुरनूल के पास स्थित डीआरडीओ परीक्षण रेंज में हवा-से-सतह और हवा-से-हवा में मार करने की क्षमता वाले मानव रहित हवाई वाहन से परीक्षित सटीक निर्देशित मिसाइल (यूएलपीजीएम )- v3 के अंतिम परिशोधित विन्यास के विकास परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे कर लिए हैं।

यह परीक्षण एकीकृत ग्राउंड कंट्रोल सिस्टम (जीसीएम )के माध्यम से संचालित किए गए, जिसका उद्देश्य यूअलपीजीएम हथियार प्रणाली का प्रभावी कमान एवं नियंत्रण सुनिश्चित करना था। यह जीसीएस प्रणाली अत्याधुनिक तकनीक से लैस है, जो तत्परता, लक्ष्य निर्धारण और प्रक्षेपण प्रक्रियाओं को स्वचालित बनाकर मिशन की दक्षता और सटीकता को बढ़ाती है।

डीआरडीओ ने मिसाइलों के विकास और उत्पादन के लिए हैदराबाद स्थित भारत डायनामिक्स लिमिटेड और हैदराबाद स्थित अदानी डिफेंस सिस्टम एंड टेक्नोलॉजीज लिमिटेड नामक दो उत्पादन एजेंसियों के साथ साझेदारी की है। वर्तमान परीक्षणों के लिए इस प्रणाली को बेंगलुरू स्थित न्यू स्पेस रिसर्च एंड टेक्नोलॉजीज द्वारा विकसित यूएवी में एकीकृत किया गया है।

यूएलपीजीएम मिसाइल को हैदराबाद स्थित इमारत अनुसंधान केंद्र द्वारा नोडल प्रयोगशाला के रूप में अन्य डीआरडीओ प्रयोगशालाओं जैसे कि हैदराबाद स्थित रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला (डीआरडीएल), चंडीगढ़ स्थित टर्मिनल बैलेस्टिक्स अनुसंधान प्रयोगशाला (टीबीआरएल ), चंडीगढ़ स्थित और पुणे स्थित उच्च ऊर्जा सामग्री अनुसंधान प्रयोगशाला (एचईएमआरएल) के साथ मिलकर विकसित किया गया है।

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों ,रक्षा उत्पादन भागीदारों और उद्योग जगत को यूएलपीजीएम-वी 3 के सफल परीक्षणों के लिए बधाई दी।

उन्होंने कहा कि टैंक रोधी भूमिका के लिए हवा-से-सतह तथा ड्रोन, हेलीकॉप्टर और अन्य हवाई लक्ष्यों पर हमले के लिए हवा- से -हवा मोड में इसकी सफलता रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक उपलब्धि है।

रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉक्टर समीर वी .कामत ने परीक्षणों से जुड़ी सभी टीमों को इस सराहनीय उपलब्धि के लिए बधाई दी।

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