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मिसाइल एलीट क्लब में शामिल हुआ भारत: DRDO की RAMJET तकनीक का परीक्षण सफल, रक्षा क्षेत्र में और बढ़ी ताकत

By Lava PandeyEdited By: Rajat Mourya
Published: Tue, 03 Feb 2026 05:53 PM (IST)Updated: Tue, 03 Feb 2026 09:34 PM (IST)

डीआरडीओ ने ओडिशा के चांदीपुर में सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट (SFDR) तकनीक का सफल परीक्षण किया। इस उपलब्धि से भारत ...और पढ़ें

ओडिशा में DRDO ने किया SFDR टेक्नोलॉजी का सफल परीक्षण, भारत को मिलेगी सामरिक बढ़त

ओडिशा में DRDO ने किया SFDR टेक्नोलॉजी का सफल परीक्षण, भारत को मिलेगी सामरिक बढ़त

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लावा पांडे, बालेश्वर। भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने स्वदेशी रक्षा क्षमता को नई ऊंचाई देते हुए मंगलवार को ओडिशा के चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज (आईटीआर) से सालिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट (एसएफडीआर) तकनीक का सफल उड़ान परीक्षण किया।

इस उपलब्धि के साथ भारत अब उन गिने-चुने देशों में शामिल हो गया है, जिनके पास अत्याधुनिक हाई-स्पीड मिसाइल प्रणोदन तकनीक मौजूद है।

एसएफडीआर तकनीक विशेष रूप से लंबी दूरी की वायु-से-वायु मिसाइलों के लिए विकसित की गई है, जो पारंपरिक प्रणालियों की तुलना में अधिक गति, बेहतर मारक क्षमता और लंबी रेंज प्रदान करती है।

इस प्रणाली की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह उड़ान के दौरान निरंतर थ्रस्ट देती है, जिससे लक्ष्य तक पहुंचने की क्षमता कई गुना बढ़ जाती है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफलता को आत्मनिर्भर भारत अभियान की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताते हुए डीआरडीओ और सहयोगी उद्योगों की सराहना की।

वहीं, डीआरडीओ अध्यक्ष एवं रक्षा अनुसंधान विभाग के सचिव डॉ. समीर वी कामत ने वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और तकनीकी टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि भारत की भविष्य की मिसाइल शक्ति को और मजबूत करेगी। यह परीक्षण न केवल तकनीकी दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि देश की सामरिक सुरक्षा को भी नई मजबूती प्रदान करने वाला साबित होगा।

परीक्षण के दौरान नोजल-रहित बूस्टर, सालिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट मोटर और अत्याधुनिक फ्यूल फ्लो कंट्रोल सिस्टम सहित सभी प्रमुख उप-प्रणालियों ने निर्धारित मानकों के अनुरूप उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।

ग्राउंड बूस्टर मोटर ने मिसाइल को आवश्यक मैक गति तक पहुंचाया, जिसके बाद रैमजेट प्रणाली सक्रिय होकर सफलतापूर्वक संचालित हुई। उड़ान के दौरान प्राप्त सभी आंकड़ों को चांदीपुर में तैनात रडार, टेलीमेट्री और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल ट्रैकिंग सिस्टम के माध्यम से रिकॉर्ड किया गया।

विश्लेषण में सिस्टम के स्थिर, सुरक्षित और प्रभावी संचालन की पुष्टि हुई। इस परीक्षण की निगरानी डीआरडीओ की रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला (डीआरडीएल), उच्च ऊर्जा सामग्री अनुसंधान प्रयोगशाला (एचईएमआरएल) और आईटीआर के वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने की।