संसू, भुवनेश्वर : ओड़िया भाषा को शास्त्रीय मान्यता दिलाने में अहम भूमिका निभानेवाले भाषाविद देवी प्रसन्न पटनायक ने केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय की ओर से जारी शास्त्रीय भाषा पुरस्कारों की सूची पर सवाल उठाए हैं। मंत्रालय को लिखे पत्र में पटनायक ने कहा है कि हाल ही में भाषाविदों के लिए जारी पुरस्कारों की सूची में ओड़िया भाषाविदों का नाम ही नहीं है। मौजूदा साल के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार, महर्षि बाद्रायन ब्यास पुरस्कार की घोषणा हुई है। इसमें तेलुगु भाषा के लिए 15, पाली, प्राकृत, अरबी, पारसी शास्त्रीय कन्नड, शास्त्रीय तेलुगु सहित संस्कृत भाषा के लिए पुरस्कार दिए गए लेकिन ओडि़या भाषा के लिए किसी का चयन नहीं हुआ। उन्होंने प्रश्न उठाया है कि ओड़िया भाषा को तो शास्त्रीय भाषा की मान्यता दी गई है लेकिन ओडि़या भाषाविदों के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। पटनायक ने पुरस्कार के लिए अपनाई जा रही चयन प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं और मंत्रालय से जवाब मांगा है कि राज्य सरकार द्वारा भेजे गए नामों पर विचार क्यों नहीं किया गया। पटनायक ने यह भी पूछा है कि क्या अन्य भाषा के क्षेत्र में भी ऐसा ही किया गया है।

Posted By: Jagran