बालेश्वर, लावा पांडे। रक्षा विभाग का चालक विहीन एयरक्राफ्ट बंसी मानो अब बच्चों का खिलौना बन चुका है। यदि यह कहा जाए कि आज बारूद पर बच्चे खेलने को मजबूर हैं तो शायद कम नहीं होगा। एक वर्ष पहले चांदीपुर रक्षा विभाग की ओर से बंसी नामक एयरक्राफ्ट का परीक्षण किया गया था। चांदीपुर परीक्षण स्थल के पास मौजूद गांव तालपदा पाही में कुछ महीने पूर्व इसी गांव का एक मछुआरा मछली पकड़ने के लिए समंदर के भीतर गया था। अचानक बंसी नामक यह परीक्षण किया जा चुका एयरक्राफ्ट जाल में फंस गया था।

चालक विहीन इस एयरक्राफ्ट बंसी को इस मछुआरे ने समंदर से उठाकर अपने घर को ले आया तथा तब से आज तक यह एयरक्राफ्ट उसी के घर के सामने पड़ा हुआ है। आज इस एयरक्राफ्ट पर बच्चे इसे खिलौना समझकर इस पर खेलते साफ देखे जा सकते हैं। आज भी इस एयरक्राफ्ट में कई ऐसे यंत्र लगे हैं जिसके बारे में न तो उक्त मछुआरे को या फिर उक्त गांव के लोगों को कुछ मालूम है।

यदि आज यह कहा जाए की यह एयरक्राफ्ट खतरे से खाली नहीं है तो शायद असंभव नहीं होगा। इस एयरक्राफ्ट के मिलने के बाद से ही गांव वालों ने इसकी सूचना प्रशासन को दिए थे तथा कई मीडिया से जुड़े लोगों ने इसे खबर भी बनाया था। लेकिन आज तक इसे लेने कोई नहीं आया।

गांव वालों की मानें तो कई कई बार इसकी सूचना जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों को दिए जाने के बाद भी, आज तक उनके कानों पर जूं न रेंगना तथा इसे गंभीरता से ना लेना अपने आप में कई सवालों को जन्म देता है। वहीं सूत्रों की मानें तो गोला बारूद में प्रयोग होने वाले पीतल ब्रास और लोहे जैसे धातु को उनमें से निकालकर बेचने की लालच से ही मछुआरे समुद्र के भीतर गिरे रक्षा विभाग के कई सामानों को उठाकर अपने घरों को ले आते हैं। समय-समय पर परीक्षण स्थल के आसपास बसे गांव के लोगों को इस संपर्क में सतर्क भी किया जाता है। लेकिन पैसे की लालच के आगे वह अपनी जान की बाजी लगाने को तैयार हो जाते हैं ।

यह कहना है रक्षा विभाग के एक रिटायर वरिष्ठ अधिकारी का।

उन्होंने बताया कि परीक्षण स्थल के करीब आज कई गांव बस चुके हैं । लोगों को समझना चाहिए कि वे सतर्क रहें । रक्षा विभाग के प्रयोग में आने वाले किसी भी गोला-बारूद या किसी भी वस्तु को न छुएं । लेकिन चंद पैसों की लालच के चलते वह अपनी जान जोखिम में डालकर रक्षा विभाग द्वारा प्रयोग में लाया गया सामान समुद्र से बटोर कर ले आते हैं ।

उन्होंने बताया कि इस तरह की वारदात के चलते किसी भी समय किसी भी बड़ी घटना या दुर्घटना को नहीं नकारा जा सकता। कई कई बार कई गोला बारूद पानी में यानी कि समुद्र में प्रयोग के दौरान बिना फटे ही गिरे रहते हैं। लोगों को यह मालूम नहीं पड़ता कि यह गोला बारूद अभी फटा नहीं है। वे लोग इसे उठाकर ले आते हैं तथा इनमें से पीतल लोहा या अन्य धातु को निकालकर बेचने की मनसा के चलते इसे ठोकने लगते हैं। यह बिना फटा हुआ प्रयोग में लाया गया गोला बारूद उक्त व्यक्ति के घर में फटेगा या उक्त गांव में फटेगा तो एक साथ न जाने कितने लोगों की जाने जा सकती हैं।

बीते वर्ष चांदीपुर के नजदीक स्थित वर्धनपुर के बालीपही मैं एक मिसाइल के परीक्षण के दौरान उक्त मिसाइल का बड़ा अंश उक्त गांव में गिर पड़ा था। एक निर्जन स्थान पर या खाली स्थान पर गिरने के कारण किसी प्रकार की कोई घटना या दुर्घटना नहीं घटी थी । जिसे बाद में रक्षा विभाग से जुड़े आईटीआर वालों के डिस्पोजल टीम उक्त स्थान पर पहुंच कर मिसाइल में प्रयोग किए जाने वाला वह अंश को उठाकर ले गए थे। समय रहते यदि चांदीपुर परीक्षण रेंज के करीब बसे गांव के लोग सतर्क ना होंगे, रक्षा विभाग के द्वारा प्रयोग किए जाने वस्तुओं को समुद्र से उठाकर नहीं लाएंगे तो किसी भी बड़ी घटना या दुर्घटना को आमंत्रण या निमंत्रण नहीं देंगे।

सवाल है कि बंसी नामक यह एयरक्राफ्ट विगत इतने दिनों तक गांव में पड़ा है तथा आज इस पर बच्चे शान से अपनी जान की परवाह किए बगैर खेलते नजर आते हैं। आखिर कब इसे रक्षा विभाग वाले या जिला प्रशासन उठाकर ले जाएंगे। 

Edited By: Priti Jha