अनुगुल, जागरण संवाददाता। ओडिशा के ढेंकनाल में महुलीपाड़ा गांव के पास जंगली इलाके में एक तालाब में बुधवार को एक हाथी के बच्चे का शव मिला। स्थानीय ग्रामीणों ने सबसे पहले शव को देखा और इसकी सूचना वन विभाग को दी। वन अधिकारियों ने बताया कि हाथी के बच्चे की उम्र करीब पांच से छह साल है, लेकिन बच्चे की मौत के कारणों का पता नहीं लगा। बताया गया है कि बच्चा जंगली हाथियों के झुंड का सदस्य था जो भोजन की तलाश में क्षेत्र में आये थे। वन अधिकारियों ने मौत के कारणों की जांच शुरू कर दी है। 

तेंदुए की मौत के कारणों का पता लगाने की जारी कोशिश

इधर ढेंकनाल हिंदू रेंज के खजुरियाकोटा खंड के बरिहरगडी गांव के पास बुधवार को एक मृत तेंदुआ मृत पाया गया। स्थानीय ग्रामीणों की सूचना पर वन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और तेंदुए की मौत की जांच शुरू की। वन विभाग के अधिकारी अभी तक जानवर की मौत के कारणों का पता नहीं लगा पाए हैं। वे यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि तेंदुआ स्वाभाविक रूप से मरा है या किसी शिकारी ने उसे मारा है।

ओडिशा में हाथियों की मौत ने बढ़ाई वन विभाग की चिंता

डीएफओ प्रकाश चंद गोगिनेनी ने कहा, 'हमने सूचना मिलने के बाद एक टीम भेजी है और मौत के कारणों का पता पोस्टमार्टम के बाद चलेगा।' वन अधिकारी ने कहा कि हो सकता है कि तेंदुआ पास के जंगल से आया हो, हालांकि तेंदुओं की आवाजाही की कोई पूर्व सूचना नहीं है। ओडिशा में हाथियों की मौत का मामला एक गंभीर विषय बनता जा रहा है। बीते दिन सिमलीपाल अभ्यारण्य से हाथी का सड़ा हुआ शव बरामद किया गया। इस बारे में संदेह जताया गया कि हाथी को शिकारियों ने मारा है। 

राज्‍य में मानव-हाथी संघर्ष में हुई वृद्धि

इसके अलावा, ओडिशा में मानव-हाथी में संघर्ष भी चिंता का विषय बना हुआ है, जिसमें रिकॉर्ड संख्‍या में लोगों की मौतें हाे रही हैं और संपत्ति को भी नुकसान पहुंच रहा है। हाल ही में ओडिशा वन विभाग ने ओडिशा उच्च न्यायालय में 'हाथियों के संरक्षण और ओडिशा में मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के लिए व्यापक कार्य योजना' वाली एक 10-स्तंभ रणनीति प्रस्तुत की थी।

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Edited By: Arijita Sen

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