जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर : चक्रवात फणि का कहर का मंजर एक सप्ताह भी पुरी, खुर्दा, भुवनेश्वर, कटक में साफ दिख रहा है। लोग आज भी मौलिक सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। पानी, बिजली, सड़क की विकराल समस्या बनी हुई है। हालांकि ओडिशा सरकार ने कुशल आपदा प्रबंधन का दावा किया है मगर उनके दावों की पोल बदइंतजामी खोलती है। बीते चक्रवाती तूफानों से आपदा प्रबंधन ने सीख नहीं लिया है वरना सात दिन बाद स्थितियों में काफी कुछ सुधार किया जा सकता था। अब तक हुई 41 मौतों और अरबों की संपत्ति की तबाही फणि फनी की तीव्रता का प्रमाण है। राज्य के तटीय इलाकों में रहने वाले 10 हजार गांवों के 11 लाख लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना आसान नहीं था। इससे जनहानि तो थाम ली गई पर बाकी तबाही को नहीं रोका जा सका। चक्रवात गुजरने के सात दिन बीत जाने पर भी राहत और पुनर्वास के काम में अभी कहीं न कहीं कुप्रबंधन झलक रहा है। नीति आयोग की स्टैंडिग कमेटी के सदस्य जगदानंद राहत एवं पुनर्वास के कार्य में तेजी के लिए सिविल सोसायटी सक्रिय करते हुए रोजाना सीवाइएसडी में बैठकें कर रहे हैं। उनके साथ राज्य, देश व विदेश के गैर सरकारी संगठन अपने अनुभव साझा कर रहे हैं। जमीनी सर्वे के बूते सरकार को हकीकत कराने के साथ ही राहत के काम में सिविल सोसायटी सहयोग दे रही हैं। कमियां उजागर करके सरकार को अवगत कराया जा रहा है। इन सबके बावजूद लोग आज भी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं।

सुपरसाइक्लोन के बराबर तीव्रता

पुराने लोगों को 1999 का सुपरसाइक्लोन चक्रवात याद होगा जब 220 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार वाली हवाओं ने ओडिशा को तबाह कर दिया था। इस चक्रवात ने दस हजार से ज्यादा जिंदगियां लील ली थी। ओडिशा इसका मुकाबला इसकी तीव्रता को देखते हुए, करने को शायद तैयार नहीं था। गांवों के नामोनिशान मिट गए थे। लाखों लोग बेघर हो गए थे। ओडिशा यूं तो चक्रवाती तूफानों से जूझता रहा, पर सुपरसाइक्लोन ने अकेले जगतसिंहपुर में ही 8 हजार लोगों को लील लिया था। इस अनुभव के बाद ओडिशा ने तूफानों से टकराना सीख लिया था।

12 अक्टूबर 2013 को फेलिन चक्रवात में मृतकों की संख्या 34 थी। बीते साल 2018 में तितली चक्रवात ने 65 जानें ले ली थी। फणि जब तीन मई को पुरी तट से टकराया था तो हवाओं की गति 180 से 220 किलोमीटर प्रतिघंटा बतायी गयी पर हताहत हुए 41 लोग। संचार, बिजली, सड़क, पेड़ आदि का भारी नुकसान हुआ।

शून्य दुर्घटना का दावा फुस्स

फणि चक्रवात में भी आपदा प्रबंधन ने मौत की घटनाएं रोक लीं। राज्य का लक्ष्य शून्य दुर्घटना (जनहानि पूरी तरह से रोकने) था। ओडिशा 480 किलोमीटर के समुद्र तट के किनारे हजारों कच्चे मकानों में रहने वाले 11 लाख लोगों को बकौल मुख्य सचिव आदित्य प्रसाद पाढ़ी ने गुरुवार रात तक सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की योजना कामयाब रही। लगभग दस हजार गांव के घरों को फणि चक्रवात लगभग उजाड़ दिया है। उन्हें घर देने की बड़ी चुनौती सरकार के सामने है।

नौ सेना के सहयोग से संचालित हो रहीं साझी रसोई

पिछले बीस सालों में आपदा प्रबंधन और राहत डिपार्टमेंट ने प्राकृतिक आपदाओं के प्रभाव पर काबू पाने के लिए बड़ी बड़ी योजनाएं बनायीं और व‌र्ल्ड बैंक से मदद भी ली। आइआइटी खड़गपुर की मदद से 900 चक्रवात राहत शिविरों का निर्माण किया गया। सैकड़ों साझी रसोई भारतीय नौ सेना के सहयोग से संचालित की जा रही हैं।

फणि चक्रवात की खास बातें

-1999 में आए सुपरसाइक्लोन जैसा ताकतवर था फणि चक्रवात

-चेतावनी पर आपदा प्रबंधन ने ओडिशा को भारी जनधन क्षति से बचाया

-1500 से ज्यादा बसें लगाकर पुरी व कोर्णाक से पर्यटकों को हटाया गया।

-24 घंटे में 13.41 लाख लोग निकाले गए, एक करोड़ से ज्यादा लोग प्रभावित।

-11 जिलों के 14,835 गांव प्रभावित हुए।

-पानी, बिजली, सड़क व्यवस्था बहाली के प्रयास युद्धस्तर पर जारी।

-पूर्ण क्षतिग्रस्त घरों के लिए 95,100 रुपये।

- आंशिक क्षतिग्रस्त घरों को 52 हजार की मदद

-हल्काफुल्का नुकसान में 3,200 रुपये मदद की घोषणा।

-मुख्य सचिव आदित्य प्रसाद पाढ़ी के मुताबिक 41 मौतें हुईं।

-हावड़ा-चेन्नई मार्ग पर ट्रेनों क परिचालन शुरू।

-314 ब्लाक में से 137 ब्लाक 14,835 गांव बुरी तरह प्रभावित।

-400 केवी के पांच टावर, 220 केवी के 27 टावर व 130 केवी के चार ग्रिड ध्वस्त हुए।

-33केवी की 5030 किमी, 11केवी की 38,613 किमी. व लाइनें क्षतिग्रस्त।

-11077 विद्युत वितरण ट्रांसफारमर, 79,485 किमी. लोटेंशन लाइन क्षतिग्रस्त।

बोले विशेष राहत आयुक्त

हर शेल्टर खाद्य सामग्री व अन्य जरूरी चीजें रखी गयी थी। एक-एक शेल्टर में करीब 50 स्वयंसेवी रखे गए थे। कोई भी बेघर नहीं रहेगा।

विष्णुपद सेठी, विशेष राहत आयुक्त

--------------

Posted By: Jagran

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप