जासं, भुवनेश्वर : विगत तीन मई को आए चक्रवात फणि के प्रभाव से राजधानी भुवनेश्वर पूरी तरह से तबाह हो गई है। चक्रवात के बाद लोग खाने से लेकर पीने के पानी को तरस गए। ऐसे में मजबूरी में ही सही, राजधानी को छोड़कर लोग अपने गांव घर जाना ही उचित समझा। खासकर छात्रों की दुर्दशा अकथनीय है। हास्टल में रहने वाले छात्र खाना तो दूर पानी के लिए तड़प उठे ऐसे में स्थिति सामान्य होते ही जो साधन मिला छात्रों ने अपने-अपने गांव का रुख करना ही उचित समझा। हालांकि इसमें सबसे बड़ी परेशानी पैसे की थी क्योंकि एटीएम से रुपये नहीं निकल रहे थे। ऐसे में एक छात्र ने भुवनेश्वर से साइकिल के जरिए लगभग 207 किलोमीटर दूर मयूरभंज की यात्रा शुरू कर दी। छात्र का नाम कुनाराम मुर्मू है। उसका घर मयूरभंज जिला के जशीपुर गांव में है और भुवनेश्वर में रहकर वह पढ़ाई करता था। चक्रवात फणि के प्रभाव से भुवनेश्वर में दिन गुजारना मुश्किल हो गया। ऐसे में उसने घर जाने का निर्णय लिया। राजधानी में बिजली न होने से कोई भी एटीएम काम नहीं कर रहा था और कुनाराम के पास पैसे नहीं थे। कुनाराम ने साइकिल से अपनी यात्री मयूरभंज के लिए शुरू कर दी। रास्ते में उसे जोरदार भूख लगी ऐसे में खाएंगे क्या क्योंकि उसके पास तो एक रुपया भी नहीं था। बड़चड़ा स्टेशन के पास एक दहीबड़ा बेचने वाले के पास कुनाराम पहुंचे और अपनी असुविधा के बारे में बताया। इसके दही-बड़ा बेचने वाले व्यक्ति ने उन्हें खाने को दिया और पैसा नहीं मांगकर यह प्रमाणित कर दिया कि आज भी मानवता जिदा है। यहां दहीबड़ा खाने के बाद कुनाराम साइकिल के जरिए कटक, चंडीखोल, ठाकुरमुंडा होते हुए करंजिया एवं फिर जशीपुर पहुंचे। हालांकि इस बीच करंजिया में एक अस्पताल में कुनाराम को रात गुजारनी पड़ी।

Posted By: Jagran

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