जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर : पुरी के समुद्र तट से विगत तीन मई को तेज हवाओं के साथ टकराया चक्रवात फणि ओडिशा को गहरे जख्म देकर गया है। विशेष राहत आयुक्त विष्णुपद सेठी के मुताबिक चक्रवात फणि के कहर में 43 लोगों के मरने की अब तक सूचना है। यह संख्या बढ़ भी सकती है।

उन्होंने बताया कि मौत का यह आंकड़ा और भी भयानक होता लेकिन आपदा प्रबंधन में माहिर ओडिशा सरकार इसे थाम लिया पर प्राकृतिक संपत्ति और घरों को बचाना संभव नहीं हो पाया। कहने को तो 14 जिले प्रभावित हुए पर सबसे ज्यादा प्रभाव पुरी, खोर्दा, भुवनेश्वर व कटक पर पड़ा। करीब दस दिन हो गए हैं लेकिन इन जिलों में बिजली, पानी, सड़क, संचार का संकट अभी बरकरार है।

मौसम विज्ञान से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मियों में ऐसे चक्रवाती तूफान बेहद कम आते हैं, आमतौर पर मानसून के बाद सितंबर-नवंबर में ऐसे तूफान आते हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, 1965 से 2017 तक बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में 46 भयानक चक्रवात दर्ज किए गए हैं। इनमें से अक्टूबर से दिसबर के बीच 28 चक्रवात आए, 7 चक्रवात मई में और महज दो चक्रवात अप्रैल (1966, 1976) में आए। 1976 के बाद फणि पहला ऐसा चक्रवात है, जिसका निर्माण अप्रैल में शुरू हुआ। पिछले तीन दशकों में पूर्वी तटों से टकराने वाला यह चौथा सबसे खतरनाक चक्रवात है। ओडिशा ने इससे पहले जिन भयानक चक्रवाती तूफानों का सामना किया है, वे साल 1893, 1914, 1917, 1982 और 1989 में आए थे। ये तूफान या तो यहां खत्म हो गए थे या फिर पश्चिम बंगाल के तटों की तरफ चले गए थे। विशेषज्ञों का कहना है कि ग्लोबल वॉíमंग के कारण हमें भविष्य में भी इस तरह की स्थितियों का सामना करना पड़ सकता है।

35 खतरनाक चक्रवातों मे से 26 बंगाल से

अब तक आए सबसे खतरनाक 35 चक्रवात में से 26 बंगाल की खाड़ी से शुरू हुए हैं। 1999 में आए सुपर साइक्लोन, जो ओडिशा में 30 घंटे तक रहा था, में 10 हजार लोग मारे गए थे। इससे पहले 1971 में ऐसे ही चक्रवात में भी करीब 10 हजार लोग मारे गए थे। अक्टूबर 2013 में चक्रवात फेलिन और पिछले साल चक्रवात तितली के प्रकोप से बड़ी संख्या में लोगों को बचाने के लिए उन्हें पहले ही सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया जा चुका है। हालांकि उसके बाद भी इन दोनों चक्रवातों में 77 लोग मारे गए थे। अक्टूबर 2014 में हुदहुद चक्रवात में 124 लोग मारे गए थे। फणि चक्रवात की तीव्रता भी लगभग उतनी ही बताई जा रही है। 2017 में चक्रवात ओक्खी की वजह से तमिलनाडु और केरल में 250 लोग मारे गए थे।

आंकड़ों के आइने में चक्रवात फणि

-सबसे बड़ी चुनौती राहत और पुनर्वास

-फणि के कारण 43 लोगों की हुई मौत

- 1 करोड़ 40 लाख लोग प्रभावित

- 16 हजार गांव पूरी तरह से तबाह

-51 शहरी निकायों पर पड़ा असर

-1 लाख 60 हजार बिजली के खंभे ढहे

-तटीय क्षेत्र के 10.40 लोग हटाए गए

-प्रभावितों के लिए बने 879 शेल्टर

-44 हजार वॉल्िटयर, 2 हजार एनडीआरएफ व एक हजार ओड्राफ जवान।

-पूर्वतट पर 1891 से 2000 तक 308 चक्रवात आए, इनमें से 103 चक्रवात बहुत तीव्र थे।

-न्यूनतम गति 62 व अधिकतम 221 किलोमीटर प्रति घंटा

-फणि की अधिकारिक गति 175 से 185 किमी प्रतिघंटा

Posted By: Jagran

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