भुवनेश्वर, जेएनएन। Chandrayan-2 चंद्रयान-2 को 98 प्रतिशत सफलता मिली है। लैंडर विक्रम में कहां पर गलती हुई, उस संदर्भ में अनुसंधान चल रहा है। लैंडर विक्रम से अभी तक संपर्क नहीं हो सका है। उससे संपर्क बनाने के लिए सभी प्रकार के प्रयास जारी हैं। लैंडर विक्रम के बारे में तथ्य मिलने के बाद अगला कदम उठाया जाएगा। यह बात शनिवार को भुवनेश्वर पहुंचने के बाद इसरो अध्यक्ष के.सिवन ने मीडिया से बात करते हुए कही है। उन्होंने कहा है कि आर्बिटर के बारे में बहुत कुछ तथ्य मिलने की हमें उम्मीद है।

आगे मिलेंगे और तथ्य 

चन्द्रयान-2 की आर्बिटर की कार्य दक्षता बहुत अच्छी है। आर्बिटर के 8 पुर्जे सही-सही काम करते रहे हैं। हम आशा करते हैं कि इस बारे में हमें आगे और भी कई तथ्य मिलेंगे। इसरो अध्यक्ष ने कहा कि अगले साल के अंत तक भारत का गगनयान कार्यक्रम शुरू होने वाला है। गगनयान सफल हो इस पर हम अभी से विशेष ध्यान दे रहे हैं। इसरो प्रमुख के.सिवन ने इस अवसर पर इसरो वैज्ञानिकों की भूरि-भूरि सराहना की है। 

 

छात्र-छात्राओं में उत्साह का माहौल

इसरो अध्यक्ष के.सिवन ने आज खुर्दा के अरुगुल स्थित आईटीआर के 8वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर यहां पहुंचने पर छात्र-छात्राओं के मन में काफी उत्साह का माहौल देखा गया। संस्थान के निदेशक प्रो आर बी राजा कुमार के मुताबिक इस साल उत्सव में तीन छात्रों को स्वर्ण पदक एवं 15 छात्रों को रौप्य पदक प्रदान किया गया। बीटेक छात्र सोहन महापात्र को राष्ट्रपति स्वर्ण पदक, एमटेक छात्र राहुल दास एवं एमएससी छात्र अनुभव नाथ को डायरेक्टर्स गोल्ड मेडल प्रदान किया गया।

5 छात्रों को मिले रौप्य पदक

उसी तरह से विभिन्न विभाग में अच्छे नंबर रखने वाले 15 छात्रों को रौप्य पदक प्रदान किया गया। बीटेक पाठ्यक्रम के विभिन्न विभाग में सोहन महापात्र, गोंथगुनटाल निहारिका, इंद्रा सिंह धाकर, गौरव विशाल, चौधुरी हृषिकेश, उमेश एवं एमटेक पाठ्यक्रम में राहुल दास, अभिषेक परिड़ा, श्रीजा मुखर्जी, अनंत दत्त, पी अभिषेक, स्पंदन दे, एमएसी एम अनुभव नाथ, शर्मिष्ठा दे, कौशिक नागेश्वर जयसवाल, सुजय नंदी को रौप्य पदक प्रदान किया गया। उसी तरह से इस अवसर पर 36 छात्र-छात्राओं को पीएचडी डिग्री, 105 छात्रों को एमटेक, 67 छात्रों को एम.एससी एवं 152 छात्र-छात्राओं को बी.टेक डिग्री प्रदान की गई है।

बता दें कि भारत के मिशन चंद्रयान-1 से चंद्रमा पर पानी की मौजूदगी का पता चला था। अब चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर से कई उम्मीदें हैं। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि चंद्रमा पर हीलियम-3, प्लैटिनम और पैलेडियम जैसे मूल्यवान पदार्थ हो सकते हैं। वैज्ञानिकों की मानें तो ऑर्बिटर पहले से निर्धारित एक साल की तुलना में सात साल तक चांद की परिक्रमा करके प्रयोगों को अंजाम देता रहेगा।

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Posted By: Babita kashyap

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