'चमकपुर' से 'शंकरपुर' नाम बदलाव पर विवाद: विस्थापन झेल रहे ग्रामीणों ने कहा- बिना पूछे लिया गया फैसला
ओडिशा के क्योंझर जिले में चमकपुर ग्राम पंचायत का नाम बदलकर शंकरपुर किए जाने से स्थानीय ग्रामीण नाराज हैं। विस्थापित परिवारों का कहना है कि पुनर्वास प्रक्रिया में बाधा आएगी।

चमकपुर ग्राम पंचायत का नाम बदलकर ‘शंकरपुर’ किए जाने से स्थानीय ग्रामीण गुस्से में हैं।
HighLights
चमकपुर पंचायत का नाम बदलकर शंकरपुर करने पर ग्रामीण नाराज।
विस्थापित परिवार दस्तावेजों में गड़बड़ी और देरी से चिंतित।
ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर से फैसले की समीक्षा की मांग की।
संसू, बड़बिल। ओडिशा के क्योंझर जिले में एक प्रशासनिक फैसले ने सियासी और सामाजिक गलियारों में हलचल मचा दी है।
चमकपुर ग्राम पंचायत का नाम बदलकर ‘शंकरपुर’ किए जाने से स्थानीय ग्रामीण गुस्से में हैं। लोगों का आरोप है कि इस अहम बदलाव से पहले न तो उनसे कोई सलाह ली गई और न ही उनकी आपत्तियां सुनी गईं।
आनन-फानन में लिए गए इस फैसले के खिलाफ ग्रामीणों ने गुरुवार को अंगुलिया स्थित विस्थापित कॉलोनी में एक तीखी बैठक की और जिला कलेक्टर को लिखित शिकायत सौंपकर फैसले की समीक्षा करने की मांग की है।
विस्थापन के दर्द के बीच कागजी संकट का डर
ग्रामीणों का कहना है कि चमकपुर पंचायत के कई परिवार पहले से ही कानपुर बृहत सिंचाई परियोजना (Kanpur Major Irrigation Project) के कारण विस्थापन और पुनर्वास की भारी समस्याओं से जूझ रहे हैं।
ऐसे में अचानक पंचायत का नाम बदल दिए जाने से प्रभावित परिवारों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है:
दस्तावेजों में गड़बड़ी: सरकारी कागजों, आधार कार्ड, बैंक खातों और पतों में नाम बदलने से भारी कन्फ्यूजन पैदा होगा।
मदद और पुनर्वास में देरी: पुनर्वास प्रक्रिया, मुआवजे की राशि के वितरण और सरकारी सहायता की मंजूरी में अनावश्यक विलंब होने की आशंका है।
गांव वालों ने दो टूक चेतावनी दी है कि वे ऐसा कोई भी प्रशासनिक कदम बर्दाश्त नहीं करेंगे जिससे कोई भी विस्थापित परिवार अपने कानूनी हक और सुविधाओं से वंचित हो जाए।
सिर्फ नाम नहीं, आम जनता के जीवन से जुड़ा है फैसला
गुरुवार की बैठक में ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा कि ग्राम पंचायत का नाम बदलना महज एक कागजी या प्रशासनिक फैसला नहीं है।
यह सीधे तौर पर स्थानीय विकास, सरकारी योजनाओं की सफलता और आम लोगों के रोजाना के कामकाज से जुड़ा हुआ है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस बदलाव से जुड़े सरकारी आदेशों और नियमों की उच्चस्तरीय जांच हो।
जब तक विस्थापितों की समस्याओं का समाधान नहीं होता, तब तक इस नाम-बदलाव की प्रक्रिया को तुरंत टाला जाए।
जनता को अपना पक्ष रखने का पूरा और पारदर्शी मौका दिया जाए।
