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भुवनेश्वर नगर निगम की पहल: प्रमुख सड़कों पर लगाए गए स्मार्ट डस्ट कलेक्टर, वायु प्रदूषण पर लगेगी लगाम

Published: Fri, 26 Jun 2026 03:00 PM (GMT+05:30)

भुवनेश्वर नगर निगम ने वायु प्रदूषण कम करने के लिए प्रमुख यातायात गलियारों में स्मार्ट डस्ट कलेक्टर लगाए हैं। यह ...और पढ़ें

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HighLights

  1. बीएमसी ने वायु प्रदूषण घटाने के लिए स्मार्ट डस्ट कलेक्टर लगाए।

  2. यह पायलट परियोजना राष्ट्रीय स्वच्छ वायु मिशन के तहत शुरू हुई।

  3. सेंसरयुक्त डस्ट कलेक्टर धूल एकत्र कर बीएमसी को अलर्ट भेजते हैं।

जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। भुवनेश्वर नगर निगम (बीएमसी) ने शहर में वायु प्रदूषण को कम करने के लिए एक अभिनव पायलट परियोजना शुरू की है। इसके तहत प्रमुख यातायात गलियारों में विशेष स्मार्ट डस्ट कलेक्टर लगाए गए हैं। परियोजना के पहले चरण में केआइआइटी स्क्वायर से पटिया स्क्वायर तक सड़क के डिवाइडर पर लगे बिजली के खंभों पर 20 डस्ट कलेक्टर स्थापित किए गए हैं।

यह परियोजना भारत सरकार के राष्ट्रीय स्वच्छ वायु मिशन के तहत पायलट आधार पर शुरू की गई है। प्रत्येक डस्ट कलेक्टर में एक विशेष सेंसरयुक्त चैंबर लगा है, जो आसपास की हवा में मौजूद धूल और प्रदूषित कणों को खींचकर अपने भीतर एकत्र करता है।

जब डस्ट कलेक्टर का संग्रहण चैंबर भर जाता है, तो यह स्वतः बीएमसी को डिजिटल अलर्ट भेजता है। इसके बाद निगम कर्मी इसे खाली कर देते हैं, जिससे यह फिर से प्रदूषित कणों को एकत्र करने का काम शुरू कर देता है।

यह पहल ऐसे समय में की गई है जब वर्ष 2025 में भुवनेश्वर को देश के स्वच्छ वायु मानकों वाले शहरों में चौथा स्थान मिला था। अब बीएमसी का लक्ष्य शहर को इस सूची में शीर्ष स्थान तक पहुंचाना है। इस तकनीक को अपनाने वाला भुवनेश्वर देश का तीसरा शहर बन गया है। इससे पहले दिल्ली और जयपुर में इस प्रकार की प्रणाली लगाई जा चुकी है।

पायलट परियोजना और आर्थिक लाभ

नगर निगम ने इस तकनीक को इसलिए चुना क्योंकि इसमें बार-बार फिल्टर बदलने का खर्च नहीं आता, जिससे यह आर्थिक रूप से अधिक टिकाऊ विकल्प बन जाता है। बीएमसी आयुक्त चंचल राणा ने कहा, “वाहनों की संख्या बढ़ने के साथ उनके पीछे से उड़ने वाली धूल और मिट्टी भी वातावरण में फैलती है। इसे नियंत्रित करने के लिए एक एजेंसी ने हमसे संपर्क किया और इस तकनीक का प्रस्ताव दिया।

इसे कई प्रयोगशालाओं में भी परखा गया है। पायलट परियोजना के तहत इसे लिंगराज मंदिर के आसपास, केआइआइटी स्क्वायर और पर्यावरण निगरानी केंद्रों के निकट स्थापित किया गया है।”

उन्होंने बताया कि शहर के विभिन्न हिस्सों में लगभग 20 डिवाइस लगाए गए हैं। “हम फिल्टर आधारित प्रणाली नहीं चाहते थे क्योंकि इससे निगम पर नियमित खर्च का बोझ पड़ता। उपलब्ध आउटडोर एयर प्यूरीफायर प्रणालियों में हमें यह तकनीक बेहतर लगी। कंपनी ने पायलट प्रोजेक्ट के तहत भुवनेश्वर के दो प्रमुख मार्गों पर ये उपकरण नि:शुल्क लगाए हैं।”

राणा ने कहा कि निगम नागरिकों से भी इस तकनीक के प्रभाव को लेकर प्रतिक्रिया प्राप्त करेगा। यदि यह वैज्ञानिक रूप से प्रभावी साबित होती है और बजट के अनुरूप रहती है, तो भविष्य में इसे स्थायी रूप से शहर के अन्य प्रमुख मार्गों पर भी लगाया जाएगा।

परियोजना की प्रभावशीलता का आकलन करने के लिए स्थापना स्थलों के पास मौजूद पर्यावरण निगरानी केंद्र आने वाले महीनों में वायु में मौजूद सूक्ष्म कणों (पार्टिकुलेट मैटर) के स्तर की लगातार निगरानी करेंगे।

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