ओडिशा में बरगढ़ के 16 गांव बने किडनी रोग के हॉटस्पॉट, पानी और मिट्टी में मिले जहरीले रसायन
ओडिशा के बरगढ़ जिले में 16 गांवों को किडनी रोग का हॉटस्पॉट घोषित किया गया है, जहां मिट्टी और पानी में कीटनाशकों व भारी धातुओं के अवशेष मिले हैं।

पानी और मिट्टी में मिले जहरीले रसायन (एआई जेनरेटेड तस्वीर)
HighLights
बरगढ़ के 16 गांव किडनी रोग के हॉटस्पॉट बने।
मिट्टी-पानी में कीटनाशक, भारी धातुएं पाई गईं।
सीकेडीयू का कारण पर्यावरणीय प्रदूषण, दूषित जल।
जागरण संवाददाता,भुवनेश्वर। ओडिशा के बरगढ़ जिले में किडनी रोग तेजी से गंभीर समस्या बनता जा रहा है। संबलपुर विश्वविद्यालय और वीमसार के संयुक्त शोध में जिले के 16 गांवों को किडनी रोग का हॉटस्पॉट पाया गया है। अध्ययन में मिट्टी और पानी में कीटनाशकों के अवशेष तथा आर्सेनिक, कैडमियम और सीसा जैसी भारी धातुओं की मौजूदगी सामने आई है।
शोधकर्ताओं ने आशंका जताई है कि पर्यावरणीय प्रदूषण, कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग और दूषित जल का संबंध क्रोनिक किडनी डिजीज ऑफ अननोन एटियोलॉजी (सीकेडीयू) से हो सकता है।
16 गांवों के 2,109 लोगों की जांच की गई
शोध के दौरान 16 गांवों के 2,109 लोगों की जांच की गई, जिनमें 1,026 महिलाएं शामिल थीं। जांच में 337 लोग क्रोनिक किडनी डिजीज (सीकेडी) से पीड़ित पाए गए। इनमें 285 मरीज ऐसे मिले, जिनमें बीमारी का स्पष्ट कारण नहीं मिल सका। यह संख्या कुल जांच किए गए लोगों का 13.51 प्रतिशत है। वहीं 52 लोगों में मधुमेह और उच्च रक्तचाप को किडनी रोग का कारण पाया गया।
अध्ययन के अनुसार सीकेडीयू से प्रभावित लोगों की औसत आयु 46 वर्ष है, जबकि सामान्य सीकेडी मरीजों की औसत आयु 53 वर्ष पाई गई। किसानों में यह बीमारी अपेक्षाकृत अधिक देखी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक तेज धूप और गर्मी में काम करना, शरीर में पानी की कमी तथा कीटनाशकों के संपर्क में रहना किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है।
सात प्रकार के कीटनाशकों के मिले अवशेष
शोधकर्ताओं ने हॉटस्पॉट और गैर-हॉटस्पॉट गांवों की मिट्टी और पानी के नमूनों की जांच की। इसमें डीडीटी, क्लोरपाइरीफॉस, एंडोसल्फान, मालाथियान, कार्बोफ्यूरान, पैरा-क्वाट और साइपरमेथ्रिन सहित सात प्रकार के कीटनाशकों के अवशेष मिले। हॉटस्पॉट गांवों में एंडोसल्फान, कार्बोफ्यूरान, पैरा-क्वाट और साइपरमेथ्रिन की मात्रा निर्धारित मानकों से अधिक पाई गई।
शोध रिपोर्ट में कहा गया है कि इन कीटनाशकों की मौजूदगी और किडनी रोग के अधिक प्रसार के बीच संभावित संबंध के संकेत मिले हैं। हालांकि, कारण और प्रभाव के संबंध को पूरी तरह स्थापित करने के लिए और विस्तृत अध्ययन की जरूरत है।
पानी में आर्सेनिक, कैडमियम और सीसा
अध्ययन में हॉटस्पॉट गांवों के जल स्रोतों में आर्सेनिक, कैडमियम और सीसा जैसी भारी धातुएं भी पाई गई हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि हीराकुद जलाशय में राख और अन्य औद्योगिक अपशिष्टों के प्रवाह से जल प्रदूषण बढ़ रहा है। इसी जल का उपयोग बरगढ़ जिले में सिंचाई और अन्य कार्यों के लिए किया जाता है, जिससे स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।
तीन गांवों को गोद लेने का प्रस्ताव
संबलपुर विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. प्रदीप नायक ने बताया कि अटाबिरा ब्लॉक के लचिदा, लसतला और खैरपाली गांवों को गोद लेने का प्रस्ताव जिला प्रशासन को भेजा गया है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने पर विश्वविद्यालय की ओर से आरओ प्लांट स्थापित कर स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही प्रभावित परिवारों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति, उपचार व्यवस्था और बीमारी के अन्य कारणों पर भी विस्तृत अध्ययन किया जाएगा।
प्रमुख बिंदु
- बरगढ़ जिले के 16 गांव किडनी रोग के हॉटस्पॉट घोषित
- 2,109 लोगों की जांच में 337 मरीज मिले
- 285 लोगों में सीकेडीयू की पहचान
- मिट्टी और पानी में सात प्रकार के कीटनाशकों के अवशेष
- जल स्रोतों में आर्सेनिक, कैडमियम और सीसा की मौजूदगी
- लचिदा, लसतला और खैरपाली गांवों को गोद लेने का प्रस्ताव
- स्वच्छ पेयजल और विस्तृत स्वास्थ्य अध्ययन की तैयारी
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