जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर : राज्य के कॉलेजों में विद्यार्थियों और शिक्षकों की उपस्थिति को लेकर राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। छात्र और शिक्षकों की उपस्थिति के लिए अलग-अलग निर्देश जारी किया गया है। सरकार के निर्देशानुसार, अब से 75 फीसद से कम उपस्थिति दर्ज होने पर छात्र-छात्राओं को परीक्षा से वंचित कर दिया जाएगा। इसी तरह शिक्षकों के लिए भी कॉलेजों में प्रत्येक कार्य दिवस में 7 घंटे की उपस्थिति अनिवार्य की गई है। सरकारी और अनुदानप्राप्त निजी कॉलेजों में यह नियम कड़ाई से लागू होगा। सरकारी कॉलेजों में परीक्षाफल खराब होने के बाद उच्चशिक्षा विभाग ने यह निर्णय लिया है। राज्य उच्च शिक्षा विभाग के मुख्य सचिव शाश्वत मिश्र ने सभी महाविद्यालयों को इस संदर्भ में पत्र लिखकर नियम का अनुपालन कड़ाई से करने को निर्देश दिया है। साथ ही कॉलेज में छात्रों की उपस्थिति एवं शिक्षकों के कार्य समय को लेकर इससे पहले के तमाम नियमों को रद करते हुए तत्काल प्रभाव से इस नए नियम का अनुपालन करने को कहा गया है।

सरकार ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था परीक्षा परिणाम निराश करने वाले हैं और इसके कारणों को खोजकर निदान किया जाएगा। सरकार की ओर से नए नियम मौजूदा शिक्षा सत्र से ही कड़ाई से लागू करने को निर्देश दिया है। छात्रों के साथ शिक्षकों पर भी नकेल कसी जा रही है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि अध्यापक प्रत्येक कार्य दिवस के दौरान कम से कम 7 घंटे कॉलेज में उपस्थित रहेंगे। नियमित शिक्षादान के अलावा पुस्तकालय और अतिरिक्त क्लास पर भी ध्यान देंगे। हालांकि अतिथि अध्यापक (गेस्ट फैकल्टी) को इससे मुक्त रखा गया है। क्योंकि, उन्हें कक्षा के हिसाब से भुगतान किया जाता है।

उल्लेखनीय है कि पिछले 29 जून को राज्य उच्च शिक्षा मंत्री अरुण साहू ने नए नियम के संबंध में जानकारी दी थी। इस नियम के संदर्भ में शुक्रवार को उच्च शिक्षा विभाग की तरफ से विज्ञप्ति जारी की गई।

Posted By: Jagran

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