भुवनेश्वर, जागरण संवाददाता। मास्टर कैंटीन चौक पर मौजूद योद्धा घोड़े की मूर्ति को अन्यत्र स्थानांतरित प्रसंग को लेकर चले काफी वाद-विवाद के बाद आखिरकार सरकार ने अपने निर्णय को वापस ले लिया है। मास्टर कैंटीन चौक की शोभा बढ़ा रहे ऐतिहासिक घोड़े की प्रतिमूर्ति को अब अन्यत्र स्थानांतरित नहीं किया जाएगा। बीएमसी आयुक्त संजय सिंह ने कहा है कि सालों से मास्टर कैंटीन की शोभा बढ़ा रहे ऐतिहासिक घोड़े को स्थानांतरित नहीं किया जाएगा, सरकारी स्तर पर यह निर्णय लिया गया है।

 गौरतलब है कि मल्टी माडल हब बनाए जाने के साथ ही स्मार्ट जनपथ के विकास के लिए बीएमसी इस ऐतिहासिक घोड़े को स्थानांतरित करने की योजना बना रही थी। वहीं इस संदर्भ में पिछले 8 तारीख को संस्कृति विभाग के निदेशक की अध्यक्षता में हुई बैठक में कहा गया था कि मास्टर कैंटीन होते हुए फ्लाइ ओवरब्रीज बनाए जाने से चौक पर मौजूद घोड़ा एवं योद्धा की मूर्ति सही से दिखाई नहीं देगी। ऐसे में इसका स्थानांतरण जरूरी है। राजभवन चौक पर इस ऐतिहासिक योद्धा एवं घोड़ा को स्थानांतरित करने का निर्णय लिया गया था।

हालांकि इस निर्णय का विरोध करते हुए भाजपा एवं कांग्रेस के नेताओं ने कहा था कि सन् 1988 में पद्म विभूषित स्व. रघुनाथ महापात्र के द्वारा ऐतिहासिक कोणार्क मंदिर के ढांचे में निर्मित यह घोड़ा ओडिशा शासन का प्रतीक है। यह राजधानी का परिचय है। ऐसे में इस ऐतिहासिक योद्धा घोड़ा को किसी भी कीमत पर स्थानांतरित नहीं होने दिया जाएगा। अब सरकार ने भी अपने निर्णय को वापस ले लिया है। बीएमसी आयुक्त ने कहा है कि ऐतिहासिक योद्धा एवं घोड़ा को कहीं भी स्थानान्तरित नहीं किया जाएगा।

Edited By: Babita Kashyap