भुवनेश्वर, जागरण संवाददाता। राज्य में अब से सरकारी कर्मचारियों के हड़ताल (strike of government employees) करने पर सरकार ने पाबंदी लगा दी है। सरकार के इस निर्णय को गणतंत्र के लिए घातक बताते हुए विपक्ष ने इसका पुरजोर विरोध किया है। विपक्ष का कहना है कि इस नए कानून के तहत सरकार जिसे चाहे जेल में बंद कर सकती है। खासकर अपने राजनीतिक विरोधियों की आवाज दबाने के लिए सरकार ने यह नया कानून लाया है।

 गौरतलब है कि राज्य सरकार ने ओडिशा अत्यावश्यक सेवा ( रख-रखाव) संशोधन बिल (Odisha Urgent Services (Maintenance) Amendment Bill) को विधानसभा में पारित करा लिया है। इस बिल के अनुसार गैरकानूनी हड़ताल या धर्मघट करने में सहायता करने वालों को सरकार एक साल जेल की सजा और 5000 तक का जुर्माना लगा सकती है। अगर सरकारी कर्मचारी आन्दोलन पर उतरते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और जरूरत पड़ने पर उन्हें नौकरी से भी हाथ धोना पड़ सकता है। सरकार का पक्ष है कि सरकारी कर्मचारी सहित विभिन्न संगठन समय-समय पर आन्दोलन पर उतर रहे हैं जिससे आम नागरिकों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। अतः लोगों को निरंतर सेवा प्रदान करने के लिए ओडिशा अत्यावश्यक सेवा ( रख-रखाव) कानून 1988 में संशोधन करना आवश्यक हो गया था। 

 उधर सरकार के ओडिशा अत्यावश्यक सेवा( रख-रखाव) कानून 1988 में संशोधन कराकर बिल पारित करवाने पर घोर आपत्ति जताते  हुए विपक्ष ने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था पर चोट बताया है।

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