भुवनेश्वर, जासं। Railway Premise. स्वच्छ भारत मिशन को रेल परिसर में सुनिश्चित करने के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के म्यूनिसिपल सॉलिड वेस्ट नियम-2016 के तहत जारी आदेशानुसार पूर्व तट रेलवे प्रबंधन ने नए जुर्माना का प्रावधान किया है। जुर्माना का यह नया प्रावधान 10 फरवरी से लागू किया जाएगा। पूर्वतट रेलवे के अनुसार, विभिन्न मंडलों में ए तथा ए.1 श्रेणी के स्टेशनों के अलावा अन्य स्टेशनों के लिए पहले जुर्माना की अलग अलग दर होती थी। नए नियम के तहत पूर्वतट रेलवे के सभी स्टेशनों में उनकी श्रेणी के अनुसार समान जुर्माना लगाया जाएगा, चाहे वे किसी भी मंडल के स्टेशन हों। गंदगी फैलाने वालों पर कार्रवाई के क्रम में पुराने दर पर पूर्वतट रेलवे में जुर्माना बढ़ोतरी देखी गई है।

2017-18 में 9301 एवं 2018-19 में 10,582 लोगों से जुर्माना वसूला गया। इसी प्रकार चालू वित्त वर्ष में दिसंबर 2019 तक रेल परिसर में गंदगी फैलाने वाले कुल 8231 लोगों से अर्थदंड वसूला गया। पुराने नियम में गंदगी फैलाने की कुल चार श्रेणियों में 100 से 500 रुपये तक जुर्माना का प्रावधान था जिसे बढ़ाकर अब 100 रुपये से 5000 रुपये तक कर दिया गया है। इसके अलावा कई अन्य गतिविधियों को भी जुर्माना के दायरे में लाया गया है। इनमें रेल परिसर में खाना पकाना, जानवरों-पक्षियों को खाना खिलाना, गाड़ियों को धोना, उनकी मरम्मत करना, बर्तन या कपड़े धोना, अतिक्रमण या सामग्री को अवैध तरीके से रखना, अनधिकृत विज्ञापन लगाना, रेलवे संपत्ति को क्षति पहुंचाना, कूड़ा-कचरा जमा करने के लिए अधिकृत विक्रेताओं द्वारा सूखे व गीले कचरे के लिए अलग-अलग डस्टबिन की व्यवस्था न करना, 50 माइक्रोन से नीचे की प्लास्टिक का उपयोग करना आदि गतिविधियां शामिल हैं।

नई जुर्माना दर 10 फरवरी 2020 से प्रभावी होगी। नए नियमों से एक ओर जहां स्वच्छ भारत मिशन को और अधिक बल मिलेगा, वहीं दूसरी ओर म्यूनिसिपल सॉलिड वेस्ट नियम-2016 के आलोक में पॉल्यूटर-पे के सिद्धांत के तहत गंदगी फैलाने वालों को और अधिक उत्तरदायित्व बनाया जा सकेगा। नये नियमों को देखते हुए पूर्वतट रेलवे ने यात्रियों से रेल परिसर में स्वच्छ परिवेश बनाये रखने के लिए सहयोग करने की अपील की है।

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