बालेश्वर, जेएनएन। रज संक्रांति मिथुन राशि में सूर्य के प्रवेश के अवसर पर मनाया जाता है। दक्षिण भारत में यह पर्व मिथुना शंकरमणम के नाम से जाना जाता है। इसे हिंदू परंपरा व रिवाजों के अनुसार सबसे शुभ अवसरों में से एक माना जाता है। ओडिशा में लोग इसे रज संक्रांति के रूप में मनाते हैं। चार दिनों के इस पर्व में कई दिलचस्प गतिविधियां होती है। यह ओडिशा में कृषि वर्ष की शुरुआत के साथ साथ विशेष रूप से इस पर्व को मनाते हुए आधिकारिक तौर पर लोग पहली बारिश का स्वागत करते हैं।

रज पर्व की धूम राज्य के सभी जिलों में देखी जा सकती है। भुवनेश्वर से लेकर अनुगुल, बालेश्वर, मयूरभंज, केंद्रापाड़ा, कटक आदि जिलों के लोग पूरी तरह रज के रंग में रंग गए हैं। इस अवसर पर लोग पीठा, आम, कटहल आदि फलों का सेवन करते हैं। रज का मीठा पान खाना लोग नहीं भूलते हैं। रज पर्व में बालेश्वर के रंजन दास का दुकान का पान बहुचर्चित है। यहां काजू, किशमिश, कैंडी के साथ प्रस्तुत पान खरीदने के लिए लोगों की लंबी कतार लगती है। 10 रुपये से लेकर 200 रुपये तक का मीठा पान लोग शान से खरीदते हैं।

रंजन की माने तो उनके पान के शौकीन केवल शहर ही नहीं बल्कि उत्तर ओडिशा के साथ राज्य के विभिन्न जिलों से भी लोग यहां आते हैं। रज पर्व पर मीठे पान की मांग जर्दा पान की तुलना में ज्यादा होती है। रंजन कहते हैं कि पान और पान के रस का उल्लेख आयुर्वेदिक दवाओं में भी होता है। पान खाने से रोग नहीं बल्कि पाचन शक्ति बढ़ती है। उल्लेखनीय है कि जो पर्यटक चांदीपुर पंच लिंगेश्वर, जगन्नाथ मंदिर आदि जगहों पर घूमने आते हैं वह बालेश्वर में रंजन दास की दुकान का पान खाना नहीं भूलते हैं।

ओड़िआ में एमए की पढ़ाई करने के बाद जब नौकरी नहीं मिली तो पान की दुकान खोल इसे पेशा बना लिया। दुकान में बनारसी पान, बालेश्वरी पान, कालीबंगला पान, फ्लेवर पान, केशरयुक्त तथा कस्तूरी आदि वैराइटी के पान उपलब्ध रहते हैं। रंजन दास, बालेश्वर