जागरण संवाददाता, बालेश्वर : सूबे का मयूरभंज जिला अब अपने आप में एक नई पहचान बनाने जा रहा है। आगामी माह में दो अक्टूबर गाधी जयंती के दिन अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन की ओर से मयूरभंज जिले को शिशु श्रमिक मुक्त जिले के रूप में ऐलान किया जाएगा। लगातार चार वर्ष के अथक प्रयास से इस जिले में शिशु श्रमिकों की संख्या में कमी आने की बात मयूरभंज के जिलाधीश राजेश प्रभाकर पाटिल ने कही है। उन्होंने बताया कि बच्चों को स्कूल भेजना तथा कोई बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे इस पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। विगत चार वर्षो में 432 बाल श्रमिकों को मुक्त कराकर उन्हें विभिन्न स्कूलों में शिक्षा के लिए भेजा जा रहा है। इस साल 18 किशोरों को भुवनेश्वर स्थित सिपेट अनुष्ठान इंजीनियरिंग में शिक्षा के लिए भेजे जाने की बात शिशु सुरक्षा अधिकारी ममता मयी विश्वाल ने कही है। विशोई स्थित शिशु श्रमिक विद्यालय में 120 शिशु श्रमिक पढ़ाई जारी रखे हैं। पूर्णचंद्र प्राथमिक विद्यालय में 42 शिशु श्रमिक एवं महारानी तकत कुमारी केजीबीभी में 40 शिशु श्रमिकों को सरकार की तरफ से पढ़ाया जा रहा है।

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