बालेश्वर, लावा पांडे। एक ओर जहां पाकिस्तान पीछे पड़ा है, तो वहीं चीन भी भारत को लाल आंखें दिखाने में लगा है, ऐसे में भारत अपनी सीमाओं की रक्षा करना बखूबी जानता है। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन डीआरडीओ ने मात्र चंद दिनों के भीतर यानी कि 30 दिनों में 8 ताकतवर एवं नए-नए किस्मों की मिसाइलों का परीक्षण करके एक और जहां देश की ताकत को दर्शाया है तो वहीं दूसरी ओर दुश्मन देशों को यह कड़ा संदेश भी दिया है कि किसी भी परिस्थिति का सामना करने के लिए हैं तैयार हम।

7 सितंबर 2020 से शुरु हुआ ये सिलसिला 

 मिसाइलों का परीक्षण ओडिशा के दो तटवर्ती इलाकों से किया जाता है। पहला बालेश्वर के चांदीपुर से जहां पर मौजूद है एक नंबर, दो नंबर और तीन नंबर लंचिंग कंपलेक्स। वहीं दूसरी ओर अब्दुल कलाम जहां पर मौजूद है चार नंबर लंचिंग कंपलेक्स। मिसाइलों के परीक्षण का सिलसिला 7 सितंबर 2020 से शुरु हुआ। इस दिन एचएसटीवीडी मिसाइल का दूसरी बार सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया था। इसका पहला परीक्षण पिछले वर्ष किया गया था। दूसरी मिसाइल लेजर गाइडेड एंटी टैंक मिसाइल का परीक्षण 22 सितंबर को किया गया। इसके 

बाद तीसरा परीक्षण 23 सितंबर को पृथ्वी मिसाइल का रात्रि कालीन सफलतापूर्वक किया गया। चौथा परीक्षण 30 सितंबर को ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का सफलतापूर्वक किया गया। पांचवा परीक्षण 1 अक्टूबर 2020 को फिर से लेजर गाइडेड एंटी टैंक मिसाइल का सफलतापूर्वक किया गया। छटा परीक्षण 3 अक्टूबर को शौर्य मिसाइल का सफल परीक्षण किया गया। सातवां परीक्षण 5 अक्टूबर को स्मार्ट वेपन सिस्टम यानी कि सुपर सोनिक मिसाइल असिस्टेंट रिलीज आफ टॉरपीडो का सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया। इसी तरह आठवां परीक्षण 9 अक्टूबर 2020 को रूद्रम मिसाइल का किया गया जो कि पूरी तरह सफल था।

मिसाइलों के क्षेत्र में पूरे विश्व में भारत बना मील का पत्थर

यहां पर हम बता दें कि भारत ने 1 महीने में जो 8 मिसाइलों का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है, वह देश के जल थल और वायु तीनों सेनाओं को मजबूत और ताकतवर करेगा। यह गर्व की बात है कि इन सारी मिसाइलों को स्वदेशी ज्ञान कौशल से भारत ने खुद ही निर्माण किया और बनाया और परीक्षण भी किया। ऐसे में आए दिन भारत ओडिशा के तट से मिसाइलों का परीक्षण तो करता रहता है लेकिन एक महीने में लगातार आठ बार दिन एवं रात को मिसाइलों का परीक्षण किया जाना एक अलग प्रकार का संदेश देता है एवं मायने रखता है। आज यदि यह कहा जाए कि भारत मिसाइलों के क्षेत्र में पूरे विश्व में एक मील का पत्थर साबित हो चुका है तो शायद कम नहीं होगा, क्योंकि आने वाले दिनों में मिसाइलें ही करेंगी युद्ध का फैसला।

 

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