जिनेवा (एएनआई)। कश्मीर के बाद अब पाकिस्तान को बलूचिस्तान के मुद्दे पर भी अंतरराष्ट्रीय बिरादरी से मुंह की खानी पड़ रही है। यूरोपियन यूनियन ने साफ कर दिया है कि यदि पाकिस्तान ने बलूचिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघन के मामले नहीं रोके तो उस पर प्रतिबंध लगाने में वह देर नहींं लगाएगा। ईयू के उपाध्यक्ष रिजार्ड सी ने प्रेस से बात करते हुए साफ कर दिया कि वह इसके लिए पाकिस्तान पर आर्थिक और राजनीतिक प्रतिबंध लगा सकता है।

बातों का नहीं कार्रवाई का समय

उन्होंने इस दौरान कहा कि वे यूरोपियन यूनियन में मानवाधिकार के मुद्दे पर आयोजित एक डिबेट में भी यह साफ कर चुके हैं कि जो देश मानवाधिकार कानून को नहीं मानते और इनका उल्लंघन करते हैं, उन पर प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। रिजार्ड ने यहां तक कहा कि अब बोलने का नहीं, बल्कि कार्रवाई का समय है। उनके मुताबिक पाकिस्तान के साथ यूरोपियन यूनियन के द्विपक्षीय संबंध हैं। ऐसे में अगर पाकिस्तान बलूचिस्तान को लेकर अपनी नीतियां नहीं बदलता है तो ईयू पर इस अपना कठोर फैसला लेने में देर नहीं लगाएगी।

पाक में सेना का नियंत्रण सरकार से ज्यादा

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के दो चेहरे हैं, एक साफ चेहरा जो वह दुनिया को दिखाता है और दूसरा क्रूर चेहरा जो मानवाधिकार को लेकर है। रिजार्ड ने इस बात को स्वीकार किया कि पाकिस्तान की समस्या ये भी है कि वहां की सरकार पर सेना का नियंत्रण है।

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भारत द्वारा बलूच का मुद्दा उठाने के बाद प्रतिक्रिया

गौरतलब है कि भारत की ओर से 15 अगस्त के मौके पर बलूचिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघन का मामला प्रधानमंंत्री नरेंद्र मोदी ने उठाया था। जिसके बाद बलूच नेताओं ने पीएम मोदी को धन्यवाद तक दिया था और उनकी चलाई जा रही मुहिम के लिए समर्थन मांगा था। इतना ही नहीं इसके बाद ज्यादा सक्रिय हुए बलूच नेताओं में से एक ब्रह्मदाग बुगती ने खुलेतौर पर पाकिस्तान के खिलाफ आवाज बुलंद करते हुए भारत से शरण तक मांगी थी। हालांकि उनकी इस अपील पर भारत ने अभी कोई फैसला नहीं लिया है। लेकिन इसके बाद भारत पाकिस्तान पर कूटनीतिक दबाव बनाने में सफल रहा है। यही वजह है कि पाकिस्तान अब इस मुद्दे पर भी मुंह की खाता दिखाई दे रहा है।

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