संयुक्त राष्ट्र। परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) की समीक्षा को लेकर करीब महीने भर से चल रही संयुक्त राष्ट्र की बैठक बेनतीजा रही। मध्यपूर्व में परमाणु हथियारों पर रोक को लेकर सदस्य देशों के बीच आम सहमति नहीं बन सकी। बैठक में 150 से ज्यादा देशों ने भाग लिया।

परमाणु अप्रसार संधि की समीक्षा को लेकर संयुक्त राष्ट्र में चार सप्ताह की चर्चा के बाद इसके 191 सदस्य राष्ट्रों के बीच कोई सहमति नहीं बन सकी। अमेरिका की उप विदेश मंत्री रोज गोटेमोएलर ने कोई सहमति न बन पाने की घोषणा की और कुछ देशों को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने यह तो नहीं बताया कि किन देशों के कारण बैठक असफल रही लेकिन मिस्र और अन्य अरब देशों को बातचीत के लिए अवास्तविक और असामान्य परिस्थितियां बनाने का दोष दिया। कनाडा और ब्रिटेन भी अमेरिका के आरोपों से सहमत दिखाई दिए। मिस्र और अरब देशों ने मध्यपूर्व में व्यापक विनाश के हथियारों पर प्रतिबंध लगाने के लिए एक बैठक की मांग की थी, जबकि इजरायल और अमेरिका ने इसे अस्वीकार कर दिया है। दूसरी ओर मिस्र के सहायक विदेश मंत्री हशीम बद्र ने बैठक बेनतीजा रहने के लिए अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा पर आरोप लगाया।

छोटे हथियारों का दुरुपयोग रोकने का प्रस्ताव पारित

संयुक्त राष्ट्र में छोटे और हल्के हथियारों के अवैध हस्तांतरण और दुरुपयोग को रोकने के लिए मजबूत सहयोग का एक प्रस्ताव पारित किया गया। सुरक्षा परिषद में इस प्रस्ताव के समर्थन में नौ वोट पड़े जबकि विरोध में एक भी वोट नहीं पड़ा। प्रस्ताव में आम नागरिकों को निशाना बनाने वाले सशस्त्र समूहों व आपराधिक संगठनों को छोटे हथियारों की अवैध बिक्री पर रोक की जरूरत पर बल दिया गया।

भारत ने किया एनपीटी पर प्रस्ताव के खिलाफ मतदान

Posted By: Kamal Verma

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