वाशिंगटन। भारत के धार्मिक और पर्यटन केंद्र बच्चों के यौन शोषण के मामले में संवेदनशील हैं। अमेरिका की 'टै्रफिकिंग इन पर्सन्स रिपोर्ट- 2013' में इस बात का उल्लेख किया गया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत को मानव तस्करी को लेकर मुकदमा चलाने के काम में तेजी लानी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इसमें शामिल लोगों को सजा दिलाई जाए। इसके मुताबिक भारत में इस प्रकार के अपराध से मुकाबला करने के लिए न्यूनतम मापदंडों का भी पूर्ण रूप से पालन नहीं किया जा रहा है। इस रिपोर्ट को अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी ने जारी किया है। इसमें कहा गया है कि भारत में बड़ी संख्या में महिलाओं और लड़कियों के यौन शोषण के मामले सामने आ रहे हैं। इसके मुताबिक धार्मिक स्थल और पर्यटन के लिए लोकप्रिय शहर अभी भी बच्चों के यौन शोषण को लेकर संवेदनशील बने हुए हैं। भारत को टीयर-दो देशों की सूची में रखा गया है। इसमें उन देशों को शामिल किया जाता है जो 'ट्रैफिकिंग विक्टिम्स प्रोटेक्शन एक्ट' के न्यूनतम मापदंडों का पूर्ण रूप से पालन नहीं करते हैं।

अमेरिकी विदेश मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि ऐसी रिपोर्टे मिल रही हैं कि भारत के उत्तर पूर्वी राज्यों और ओडिशा से महिलाओं और लड़कियों को पंजाब और हरियाणा जैसे कम लिंगानुपात वाले राज्यों में बेचा जा रहा है। उनका जबरन विवाह कराए जाने की भी रिपोर्ट प्राप्त हुई है। इनमें से कुछ को उनके नए परिवार वेश्यावृत्ति या मजदूरी के काम में ढकेल देते हैं। भारतीय महिलाएं और लड़कियां अस्थायी विवाह के बहाने मध्य पूर्व के देशों में भी यौन शोषण का शिकार होती हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि घरेलू हिंसा के डर से पति के पास से भागने वाली महिलाएं विशेष रूप से मानव तस्करी के लिए संवेदनशील होती हैं। इसके मुताबिक माओवादी जबरन अपने गुट में बच्चों की भर्ती कर रहे हैं। रिपोर्ट में मानव तस्करी में कुछ सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत की ओर ध्यान दिलाते हुए इसे गंभीर समस्या बताया गया है। इससे इस अपराध से मुकाबला करने में बाधा आती है। इसमें भारत सरकार से सिफारिश की गई है कि वह मानव तस्करी से पीडि़त व्यक्ति को दंड देना बंद कराए। इसके अलावा बंधुआ मजदूरी सहित सभी प्रकार की मानव तस्करी के लिए सजा दिलाने के काम में तेजी लाए जाने की भी सिफारिश की गई है।

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