वाशिंगटन (पीटीआई)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दामाद जेरेड कुश्नर को अमेरिकी नवोन्मेष कार्यालय (ओएआइ) का प्रमुख नियुक्त किया है। व्हाइट हाउस के इस नवगठित कार्यालय का काम नौकरशाही को जिम्मेदार बना सरकार का कायापलट करना है। 36 साल के कुश्नर फिलहाल मध्य-पूर्व और व्यवसाय के मामलों में राष्ट्रपति के वरिष्ठ सलाहकार हैं।

ट्रंप ने एक बयान में कहा है, एक पूर्व कारोबारी के नाते व्हाइट हाउस में ओएआइ की आधिकारिक घोषणा करते हुए मुझे गर्व हो रहा है। हमारे देश के समक्ष कई समस्याओं के लिए यह नवीन समाधान तैयार करेगा। नई सोच और वास्तविक बदलाव की जरूरत मेरे राष्ट्रपति चुनाव लड़ने के प्रमुख कारणों में से एक था। नया कर्यालय इन चुनौतियों से पार पाने में मदद करेगा।

वहीं, कुश्नर ने कहा है, ओएआइ अमेरिकी लोगों के जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करने वाली कई गंभीर समस्याओं के हल के लिए रचनात्मक और रणनीतिक दृष्टिकोण लेकर आएगा। निजी क्षेत्र की रचनात्मकता और नवोन्मेष की मदद से अमेरिकी लोगों के हित में यह सरकार को काम करने का अवसर मुहैया कराएगा।

क्या करेगा?

व्हाइट हाउस का यह नया कार्यालय सरकारी अभियानों और सेवाओं में सुधार, अमेरिकी लोगों के जीवन में सुधार और रोजगार सृजन को प्रोत्साहन देने से संबंधित नीतियों और योजनाओं पर राष्ट्रपति के पास सिफारिशें भेजेगा। सरकारी सेवा, सूचना तकनीक के आधुनिकीकरण आदि पर ध्यान केंद्रित करने के लिए टास्क फोर्स का गठन करेगा। ध्यान रखेगा कि चुनावी वादों पर जल्द से जल्द अमल किया जाएगा।

कैसे करेगा?

व्हाइट हाउस के मुताबिक इस कार्यालय में कई विशेषज्ञ सलाहकार और व्यवसायिक घरानों में काम कर चुके एग्जीक्यूटिव होंगे। सरकारी अधिकारियों, निजी क्षेत्र और अन्य बाहरी विचारकों से सलाह-मशविरा कर सिफारिशें तैयार करेगा। आयोग के गठन से जुड़े लोग निजी क्षेत्र के सीईओ, विचारकों और वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के साथ सौ से ज्यादा सत्र पहले ही कर चुके हैं।

उम्मीद, आशंका

कुश्नर ने हार्वर्ड और न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है। वह रियल एस्टेट के साथ जुड़े रहे हैं। वाशिंगटन पोस्ट के अनुसार उम्मीद की जा रही है कि वह निजी क्षेत्र से नए विचार लेकर आएंगे और प्रशासन को इसका फायदा पहुंचाने की कोशिश करेंगे। हालांकि आलोचकों का मानना है कि कारोबारी के तौर पर कुश्नर की सफलता को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता है। साथ ही उनका राजनीतिक अनुभव भी बेहद कम हैं। वे करीब-करीब नौसिखिया ही हैं।

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Posted By: Kishor Joshi

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