इस्लामाबाद। पाकिस्तान में प्रदर्शनकारियों व सरकार के बीच बुधवार को टकराव और बढ़ गया। संकट से घिरे प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने स्पष्ट कर दिया कि वह किसी भी हाल में इस्तीफा नहीं देंगे। संसद के सामने जमे प्रदर्शनकारियों द्वारा अपने इस्तीफे की मांग को फिर खारिज करते हुए शरीफ ने कहा कि देश पहले भी कई बार मुश्किल दौर देख चुका है। इसलिए मौजूदा राजनीतिक संकट भी खत्म हो जाएगा। जवाब में प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहे विपक्ष के नेता इमरान खान ने कहा है, 'इस्तीफा नहीं तो वार्ता नहीं।'

मौजूदा राजनीतिक संकट के बाद पहली बार नेशनल असेंबली में शरीफ ने कहा कि हम मुश्किलों से गुजर चुके हैं। देश के संविधान और कानून की सर्वोच्चता की यात्रा बिना किसी बाधा के आगे भी जारी रहेगी। 2008 के चुनावों में हमारे हाथ बंधे थे। मगर हमने प्रचार किया और चुनावों में हिस्सा लिया। हमने चुनाव में धांधली का रोना नहीं रोया। अगर हम ऐसा करते तो वह सही होता, क्योंकि उस समय एक तानाशाह का सरकार पर नियंत्रण था। उसने यह चुनाव कराए।

शरीफ ने उम्मीद जताई कि यह दौर गुजर जाएगा। पाकिस्तान समृद्धि की ओर आगे बढ़ेगा। उन्होंने साफ संकेत दिया कि उनकी सरकार और संसद बरकरार रहेगी।

इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने इमरान खान के नेतृत्व वाली तहरीक ए इंसाफ और धार्मिक नेता ताहिर उल कादरी की अवामी तहरीक (पीएटी) के प्रदर्शनकारियों को निर्देश दिया है कि वे सर्वोच्च अदालत और संसद भवन के सामने से गुजरने वाली सड़क गुरुवार तक खाली कर दें। बार एसोसिएशन और अन्य लोगों की याचिका में कहा गया कि प्रदर्शनकारी आम लोगों के आवाजाही की आजादी के अधिकार का हनन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी संसद भवन और सुप्रीम कोर्ट के बाहर गत 19 अगस्त से धरना दे रहे हैं। इस वजह से आम लोगों को इस सड़क से आना-जाना बंद है।

इमरान ने शरीफ के प्रधानमंत्री रहते आगे वार्ता से इन्कार कर दिया है। उन्होंने कहा कि इस्तीफा नहीं तो वार्ता नहीं। वहीं कादरी द्वारा दिया गया 48 घंटे का अल्टीमेटम भी समाप्त हो गया है। दोनों नेताओं के इन्कार के बावजूद सरकार ने कहा है कि वह वार्ता जारी रखेगी। मीडिया रिपोर्टो के मुताबिक, नवाज के भाई व पंजाब के मुख्यमंत्री शाहबाज शरीफ का इस्तीफा लिया जा सकता है।

देश में दो सप्ताह से राजनीतिक गतिरोध बना हुआ है। इमरान की पीटीआइ और कादरी की पीएटी शरीफ के इस्तीफे की मांग पर अड़ी हुई हैं। दोनों दलों ने सरकार पर चुनाव में धांधली और लाहौर में गत 17 जून को पीएटी के 14 कार्यकर्ताओं की हत्या का आरोप लगाया है।

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