इस्लामाबाद। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने उस विवादास्पद विधेयक पर हस्ताक्षर कर दिए हैं, जिसके तहत सुरक्षा एजेंसियों को फोन टैप करने, ईमेल पर नजर रखने और इलेक्ट्रोनिक आंकड़े जुटाने के व्यापक अधिकार मिल जाएंगे। राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के साथ यह विधेयक कानून बन गया है।

राष्ट्रपति के प्रवक्ता के मुताबिक, जरदारी ने बुधवार को द फेयर ट्रायल बिल 2012 पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इस विधेयक को संसद के ऊपरी सदन नेशनल असेंबली में पिछले साल 20 दिसंबर को और निचले सदन सीनेट में गत एक फरवरी को पारित किया गया था। एक अधिकारिक बयान में कहा गया है कि इस विधेयक के तहत कानून प्रवर्तन व खुफिया एजेंसियों को सुनियोजित अपराधों से निपटने के लिए आधुनिक तकनीक और उपकरणों के जरिए जांच और सुबूतों को इकट्ठा करने की अनुमति दी गई है। इससे इन एजेंसियों की शक्तियों में इजाफा हुआ है।

मानवाधिकार समूह यह कह कर इस विधेयक की निंदा कर रहे हैं कि इससे निजता व नागरिक स्वतंत्रता को खतरा है। अधिकारियों का कहना है कि इस कानून से खुफिया व सुरक्षा एजेंसियों को आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई की रणनीति के रूप में फोन टैप करने, ईमेल पर नजर रखने और एसएमएस के ब्यौरे जुटाने का अधिकार मिल जाएगा।

कानून मंत्री फारुक नाइक ने सीनेट को बताया कि नए कानून के लागू होने के बाद सबूत जुटाने के लिए सभी कानून प्रवर्तन व खुफिया एजेंसियां एक समान कानूनी प्रणाली से संचालित होंगी। ऐसे सुबूत अदालतों में स्वीकार्य होंगे, चाहे ये प्राथमिकी दर्ज होने से पहले ही क्यों न जुटाए गए हों।

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