संयुक्त राष्ट्र । दुनिया के दो सबसे बड़े ताकतवर देश अमेरिका और रूस के राष्ट्रपति सीरिया संकट का राजनयिक हल निकालने पर सहमत हो गए हैं। बराक ओबामा और व्लादिमीर पुतिन सीरिया में सैन्य टकराव टालने के लिए बातचीत शुरू करने पर भी रजामंद हुए हैं। हालांकि, बसर अल असद को हटाने के मसले पर मतभेद कायम है।

अमेरिका और फ्रांस के नेतृत्व में आइएस के खिलाफ हवाई अभियान चलाया जा रहा है। सीरिया में रूसी टैंक और लड़ाकू विमानों की मौजूदगी से टकराव की आशंका बढ़ गई थी। इसी के चलते दोनों देशों ने सैन्य वार्ता शुरू करने पर अपनी सहमति दी है। ओबामा से मुलाकात के बाद पुतिन ने कहा कि रूस इस बात पर विचार कर रहा है कि आइएस से लोहा ले रही सीरियाई सरकार और कुर्द लड़ाकों की मदद कैसे की जाए। अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि पुतिन सीरियाई संकट के राजनीतिक हल के महत्व को अच्छी तरह समझ चुके हैं।

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दूसरी तरफ, ओबामा ने भी रूस और ईरान के साथ सहयोग की इच्छा तो जताई, लेकिन मौजूदा संकट के लिए असद को मुख्य तौर पर जिम्मेदार भी ठहराया। असद को सत्ता से बेदखल करने के बजाय ओबामा ने सीरिया में व्यवस्थागत सत्ता परिवर्तन का सुझाव दिया। इसका मतलब यह हुआ कि अमेरिका कुछ समय तक असद को सत्ता में बने रहने देना चाहता है।

यूएन में दिखी थी कड़वाहट

संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाषण के दौरान रूसी और अमेरिकी राष्ट्रपतियों की कड़वाहट सतह पर आ गई थी। ओबामा ने सीरिया में शांति बहाली प्रक्रिया में असद की भूमिका को सिरे से खारिज कर दिया था, जबकि पुतिन ने असद को सत्ता से बेदखल करने पर अमेरिकी गुट को आगाह किया था। पुतिन का कहना था कि आइएस और अन्य आतंकी संगठनों से निपटने के लिए सीरियाई राष्ट्रपति का सत्ता में बने रहना जरूरी है क्योंकि असद की सेना व कुर्द लड़ाके ही आतंकियों से लोहा ले रहे हैं। पुतिन ने आतंकियों के खिलाफ हवाई अभियान छेड़ने से इन्कार नहीं किया है, लेकिन उन्होंने जमीनी कार्रवाई की संभावनाओं को खारिज किया है।

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Posted By: Sachin Bajpai