इस्लामाबाद। पाकिस्तान के पूर्व सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा चलाए जाने के मामले में नई सरकार ने अपना रुख साफ कर दिया है। पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) (पीएमएल-एन) सरकार ने वर्ष 2007 में आपातकाल लागू करने और संविधान के उल्लंघन के मामले में मुशर्रफ के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में मुकदमा चलाने का फैसला कर लिया है।

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मुशर्रफ पाकिस्तान के इतिहास में पहले ऐसा तानाशाह हैं, जिनके खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा चलाया जा रहा है।

द न्यूज डेली अखबार ने अपनी रिपोर्ट में एक संघीय मंत्री के हवाले से कहा है कि सरकार 69 वर्षीय मुशर्रफ को बचाने की बजाय संविधान और कानून के शासन का पालन किए जाने का समर्थन करेगी।

संघीय मंत्री ने बताया कि पीएमएल-एन प्रमुख नवाज शरीफ ने प्रधानमंत्री चुने जाने से पहले संकेत दे दिए थे कि उनकी सरकार मुशर्रफ के खिलाफ देशद्रोह के मामले में मुकदमा चलाए जाने का समर्थन करेगी। सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पालन किया जाए। सुप्रीम कोर्ट में मुशर्रफ के खिलाफ देशद्रोह के मामले में सुनवाई 24 जून से फिर शुरू होनी है।

पूर्व अटार्नी जनरल इरफान कादिर ने अदालत ने अपना बयान दाखिल करते हुए कहा था कि गत 11 मई को आम चुनाव कराने वाली अंतरिम सरकार ने मुशर्रफ के खिलाफ अभियोग चलाने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई थी।

नई सरकार को इस संबंध में फैसला लेना चाहिए। मुशर्रफ के खिलाफ देशद्रोह के मामले में अंतिम सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया था कि मुशर्रफ के खिलाफ संविधान के अनुच्छेद छह के तहत मामला चलाया जाएगा। यह अनुच्छेद देशद्रोह से संबंधित है।

नए अटार्नी जनरल मुनिर ए मलिक ने कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से मुलाकात कर इस संबंध मे बातचीत की थी।

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