इस्लामाबाद। गुलाम कश्मीर में आतंकवादी संगठन जैश-ए-मुहम्मद प्रमुख मौलाना मसूद अजहर की रैली को लेकर आतंकवाद के खिलाफ सरकार की नीति पर पाकिस्तानी मीडिया ने ही गंभीर सवाल उठाए हैं। भारत की संसद पर हमले के लिए फांसी पर लटकाए जा चुके अफजल गुरु द्वारा लिखी गई किताब के विमोचन के लिए बुलाई गई इस रैली में आए 10 हजार से अधिक लोगों को मसूद ने फोन से संबोधित किया था।

बता दें कि 2001 में भारतीय संसद पर हुए हमले के मास्टरमाइंड मसूद अजहर की यह रैली गुलाम कश्मीर की राजधानी मुजफ्फराबाद में उसी दिन हुई थी, जिस दिन भारत गणतंत्र दिवस की खुशियां मना रहा था। पाकिस्तान के जाने-माने अखबार डॉन ने रविवार को अपनी रिपोर्ट में लिखा,'प्रतिबंधित संगठन के नेता का वर्षो बाद ऐसी किसी रैली में दिखना सरकार की आतंकवाद के खिलाफ नीति पर सवाल खड़े करता है।' अखबार ने लिखा कि प्रतिबंधित संगठन के नेता का फिर से सक्रिय होना कोई अचानक नहीं हुआ है। पिछले हफ्ते मुजफ्फराबाद में हुई रैली पूरी तैयारी के साथ आयोजित की गई थी और इसमें शामिल होने के लिए लोग बसों से ढोकर लाए गए थे। अखबार ने लिखा,'ऐसा नहीं हो सकता कि स्थानीय प्रशासन व सुरक्षा एजेंसियों को इस आयोजन के बारे में पता ही न रहा हो।'

रैली को कथित रूप से मसूद अजहर के छोटे भाई और जैश-ए-मुहम्मद के शीर्ष नेताओं में शुमार अब्दुल रऊफ असगर ने भी संबोधित किया था। अखबार ने लिखा,'सेना और हमारे हुक्मरान अक्सर यह तर्क देते हैं कि जिहादी संगठनों पर प्रतिबंध केवल पाकिस्तान में है, गुलाम कश्मीर में नहीं। यह तर्क अत्यंत हास्यास्पद है क्योंकि इससे इस सवाल का जवाब नहीं मिलता कि आखिर मसूद अजहर अब भी अपने गृह जिले बहावलपुर से क्यों काम कर रहा है?'

बता दें कि मसूद अजहर वही आतंकी है जिसे 1999 में विमान अपहरण के बदले भारत ने छोड़ा था। रिहा होने के बाद उसने जैश-ए-मुहम्मद नाम का आतंकी संगठन खड़ा किया। पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के कार्यकाल में पाकिस्तान में इस संगठन को प्रतिबंधित कर दिया गया, लेकिन यह कभी खत्म नहीं हुआ। डॉन ने लिखा, 'मसूद अजहर और अन्य आतंकियों का फिर सक्रिय होना आतंकवाद पर हमारी दोहरी नीति की पोल खोलता है।'

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