लाहौर। लाहौर हाई कोर्ट ने पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की न्यायपालिका के सभी न्यायाधीशों व अदालत के अधिकारियों से वित्त वर्ष 2011-12 के लिए अपने आय-व्यय और संपत्ति की घोषणा 31 जुलाई तक करने को कहा है।

हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार ने सभी जिला व सत्र न्यायाधीशों, अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीशों, वरिष्ठ सिविल जजों और अन्य अधिकारियों को इस संबंध में सर्कुलर जारी किया है। हाई कोर्ट का यह आदेश प्रधान न्यायाधीश इफ्तिखार चौधरी की ओर से सुप्रीम कोर्ट द्वारा भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए गए अभियान की पृष्ठिभूमि में हैं।

सर्कुलर में न्यायाधीशों से अपने, पत्‍‌नी और बच्चों के नाम पर चल व अचल संपत्ति का ब्योरा देने को कहा गया है। न्यायाधीशों के बच्चों की शिक्षा पर होने वाले खर्च का ब्योरा भी मांगा गया है। साथ ही, यह भी पूछा गया है कि तय सीमा से अधिक खर्च को वह किस तरह पूरा करते हैं।

पर्यवेक्षकों का कहना है कि सांसदों व प्रांतीय प्रतिनिधियों के लिए संपत्ति की घोषणा करना जरूरी होता है। लगता है कि न्यायपालिका भी इसका अनुसरण कर रही है। वहीं, सत्तारूढ़ पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के कुछ नेताओं ने हाई कोर्ट के सर्कुलर को 'न्यायिक तिकड़म' करार देते हुए कहा है कि पिछले कुछ समय से न्यायपालिका का राजनीति में दखल बढ़ता जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले सप्ताह पूर्व प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी को राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले खोलने से इंकार करने पर अवमानना का दोषी ठहराए जाने के कारण अयोग्य करार दे दिया था।

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