बगदाद। आतंकियों से जूझ रहे इराक ने अमेरिका से हवाई हमले में मदद करने की गुहार लगाई है। कई शहरों पर कब्जा कर चुके आतंकियों द्वारा बुधवार को देश की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी के बड़े हिस्से पर कब्जा किए जाने के बाद इराक ने अमेरिका से यह आग्रह किया है। इस बीच, किरकुक में आतंकियों द्वारा 60 विदेशियों को बंधक बनाए जाने की भी खबरें हैं।

जेद्दा पहुंचे इराक के विदेश मंत्री होशयार जेबारी ने अमेरिका से आतंकियों पर हवाई हमले में मदद करने का आग्रह किया है। हालांकि, अमेरिका ने अभी कोई जवाब नहीं दिया है। दूसरी ओर, सुबह साढ़े चार बजे के करीब तेल रिफाइनरी पर हमला हुआ। विद्रोहियों के बढ़ते प्रभाव के मद्देनजर एक दिन पहले ही रिफाइनरी को पूरी तरह बंद कर वहां कार्यरत सभी विदेशी कर्मचारियों को सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया गया था।

इस घटना के बाद प्रधानमंत्री नूरी अल-मलीकी ने कई उच्च सैन्य कमांडरों को बर्खास्त करने की घोषणा की। संकट को टालने के लिए मलीकी ने विरोधियों से भी संपर्क साधा है। बर्खास्त किए गए अधिकारियों में निनेवेह के कमांडर शामिल हैं। सबसे पहले 9 जून को इसी क्षेत्र में विद्रोहियों का हमला हुआ था। प्रधानमंत्री ने कहा कि मैदान छोड़कर भागने के लिए एक अधिकारी का कोर्ट मार्शल भी होगा।

दूसरी ओर तुर्की के विदेश मंत्री ने कहा कि बगदाद स्थित उनके दूतावास से सूचना मिली है कि किरकुक में भवन निर्माण में लगे 60 विदेशी नागरिकों को विद्रोहियों ने बंधक बना लिया है। ये सभी वहां एक अस्पताल के निर्माण कार्य में लगे थे। बंधकों में पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल और तुर्कमेनिस्तान के नागरिक शामिल हैं। पिछले हफ्ते मोसुल में भी तुर्कीश वाणिज्य दूतावास से विद्रोहियों ने 49 लोगों के अलावा 31 ट्रक चालकों को बंधक बना लिया था।

अमेरिका के हवाई हमले पर संशय

वाशिंगटन। कुछ दिन पहले ही इराक में हवाई हमले की संभावना जताने वाला अमेरिका संशय में है। अधिकारियों ने कहा कि संभावनाएं कम है कि राष्ट्रपति बराक ओबामा हवाई हमलों की अनुमति देंगे। इस पर कोई फैसला नहीं हुआ है, हालांकि हमले की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता।

अमेरिका वहां की स्थानीय सेना को प्रशिक्षण देने के लिए अपनी टुकड़ी भेजने पर विचार कर रहा है। ओबामा इराकी प्रधानमंत्री नूरी पर प्रशासन को ज्यादा समावेशी बनाने का दबाव डाल रहे हैं।

इराकी धर्मस्थलों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध ईरान

ईरान के राष्ट्रपति हसन रुहानी ने कहा कि इराक में शिया धर्मस्थलों की रक्षा के लिए ईरान हरसंभव कदम उठाएगा। रुहानी ने बुधवार को हमलावरों को मिटाने और धर्मस्थलों की रक्षा के लिए लड़ने की इच्छा रखने वाले ईरानी नागरिकों के हस्ताक्षर वाली याचिका भी पेश की।

आइएसआइएल ही आइएसआइएस है

आइएसआइएस अर्थात इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया और आइएसआइएल यानी इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड लेवांट एक ही संगठन है। चरमपंथी सुन्नी लड़ाकों का यह संगठन इराक और सीरिया के इलाकों को मिलाकर एक ऐसा इस्लामी देश बनाना चाहता है जो कठोर इस्लामी कानूनों के मुताबिक चले। यह संगठन इराक में अमेरिकी दखल के दौरान 2003 में अस्तित्व में आया था। अलकायदा ने इसका हर तरह से समर्थन किया। बाद में अलकायदा इस संगठन से अलग हो गया। अब यह अलकायदा से भी अधिक मजबूत और क्रूर संगठन के तौर पर जाना जाता है। 2012 में इसने अपना नाम आइएसआइएल से आइएसआइएस कर लिया।

अरबी भाषा में इस संगठन का नाम है अल दौलतुल इस्लामिया फिल इराक वल शाम। इसका मतलब हुआ इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड अल शाम। शाम सीरिया का प्राचीन नाम है। पुराने समय में लेवांट उस इलाके को कहा जाता था जिसमें आज सीरिया, लेबनान और फलस्तीन आते हैं। लेवांट एक ऐसे इलाके के रूप में जाना जाता है जहां सबसे अधिक खूनी संघर्ष हुए। हालांकि अलकायदा ने खुद को आइएसआइएस से अलग कर लिया है, लेकिन शियाओं पर हमले करना दोनों संगठनों की रणनीति रही है।

मोसुल पर काबिज होने के बाद आइएसआइएस की ताकत में जबरदस्त इजाफा हुआ है। इस संगठन के लड़ाकों ने हेलीकॉप्टर और टैंकों के साथ वे तमाम आधुनिक हथियार भी हासिल कर लिए हैं जो अमेरिका ने इराकी सेना को दिए थे। इराकी सैनिक बिना लड़े ही मोसुल से भाग खड़े हुए थे। हालांकि उनकी संख्या तीस हजार के करीब थी और सुन्नी लड़ाकों की महज 800। इन लड़ाकों ने मोसुल के बैंकों से करीब 42 करोड़ डॉलर के बराबर नकदी भी लूट ली है।

बगदाद के और करीब पहुंचे विद्रोही, सुरक्षा बलों ने ली टक्कर

शॉर्ट मे जानें सभी बड़ी खबरें और पायें ई-पेपर,ऑडियो न्यूज़,और अन्य सर्विस, डाउनलोड जागरण ऐप