ह्यूस्टन। शोधकर्ताओं के एक दल ने पाया है कि चूहे में मात्र एक जीन के काम नहीं करने के कारण ब्लड शुगर का स्तर असामान्य रूप से कम हो जाता है। इसे चिकित्सक फास्टिंग हाइपोग्लाइसिमिया कहते हैं। यह टाइप-2 डायबिटीज के प्रमुख लक्षणों में एक है। भारतीय अमेरिकी वैज्ञानिक बेल्लूर एस प्रभाकर के नेतृत्व में हुई इस खोज के दौरान शोधकर्ताओं ने अध्ययन के लिए एमएडीडी जीन पर ध्यान केंद्रित किया था। यह नई खोज डायबिटीज के मरीजों के इलाज की एक नई संभावना देती है। यदि एमएडीडी ठीक से काम नहीं करता है तो ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित करने के लिए इन्सुलिन रक्त में नहीं जाता है।

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प्रभाकर शिकागो स्थित इलनॉइ विश्वविद्यालय में माइक्रोबायलॉजी और इम्यूनोलॉजी के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष हैं। इससे पहले प्रभाकर मानव की बीटा कोशिकाओं में से कई जीनों को अलग कर चुके हैं। इनमें एमएडीडी जीन भी है जो कुछ खास तरह के कैंसर में भी शामिल रहता है। हजारों लोगों में बहुत थोड़ा आनुवांशिक अंतर पाया जाता है।

इससे यह खुलासा हुआ है कि एमएडीडी जीन में परिवर्तन का संबंध यूरोप की जनता और चीन की 92 फीसद आबादी जिसे हान चाइनीज कहा जाता है उनके टाइप-टू डायबिटीज से जुड़ा है। प्रभाकर कहते हैं कि इस तरह के बदलाव वाले लोगों के रक्त में ग्लूकोज की मात्रा अधिक होती है और इंसुलिन निकलने की समस्या भी होती है। दुनिया में 36.6 करोड़ लोग टाइप टू डायबिटीज के शिकार हैं।

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