दावोस, प्रेट्र। विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) और कई देशों के मंत्रियों ने विश्व व्यापार के समावेशी विकास के लिए बेहतर घरेलू नीतियां बनाने का आह्वान किया है। गुरुवार को विश्व आर्थिक फोरम (डब्ल्यूईएफ) की बैठक में व्यापार बाधाओं को दूर रखने पर सबसे ज्यादा जोर दिया गया। साथ ही संरक्षणवाद के नए रूप में अंदरूनी फोकस वाले वैश्वीकरण पर चिंता जताई गई। इस सबके बावजूद भारत और चीन की रफ्तार के बल पर ग्लोबल अर्थव्यवस्था में सुधार की संभावना के साथ यह पांच दिनी सम्मेलन समाप्त हो गया।

इस मौके पर डब्ल्यूटीओ के महानिदेशक रॉबर्टो एजेवेडो, भारतीय वाणिज्य व उद्योग मंत्री निर्मला सीतारमण और जापानी विदेश मंत्री केनतारो सोनुरा समेत कई राजनेता मौजूद थे। बैठक में ज्यादातर वक्ताओं का कहना था कि वास्तव में व्यापार बाधाएं रोजगार बढ़ाने के बजाय नौकरियों को खत्म करती हैं। ग्लोबल व्यापार में बढ़ोतरी से विकास की रफ्तार तेज हुई है। इससे रोजगार भी ज्यादा पैदा हुए हैं। एजेवेडो ने कहा कि 2017 डब्ल्यूटीओ के लिए अहम साल है। यहां डब्ल्यूईएफ के एजेंडे में व्यापार का मुद्दा काफी ऊपर है। ग्लोबल नियम अनुचित व्यापार व्यवहारों पर रोक लगाते हैं। इसके बावजूद सदस्य देशों को व्यापार में अड़ंगे लगाने जैसे कदम उठाने से बचना चाहिए।

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अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आइएमएफ) की प्रबंध निदेशक क्रिस्टीन लगार्ड ने कहा कि भारत और चीन जैसे ग्रोथ के नए इंजनों की बदौलत विश्व अर्थव्यवस्था में सुधार आना तय है। भारतीय बैंकर उदय कोटक ने धुंधली ग्लोबल अर्थव्यवस्था के आसमान में भारत को चमकता सितारा बताया। अलबत्ता सम्मेलन के दौरान अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद नीतियों में अनिश्चितता को लेकर नीति निर्माताओं और कारोबारी दिग्गजों ने चिंता जताई। चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने वैश्वीकरण को दोधारी तलवार बताया। उन्होंने कहा कि दुनिया की समस्याओं के लिए इसे जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है।

सम्मेलन की खास बात यह भी रही कि इस दौरान नीति आयोग, विश्व बौद्धिक संपदा अधिकार संगठन और कॉर्नेल यूनिवर्सिटी ने इंडिया इनोवेशन इंडेक्स तैयार करने की खातिर हाथ मिलाया है। यह इंडेक्स भारतीय राज्यों के प्रदर्शन की रैंकिंग करेगा। इसकी ओर से पहली ऐसी रैंकिंग नई दिल्ली में चार से छह अक्टूबर, 2017 के बीच होने वाली इंडिया इकोनॉमिक समिट में जारी की जाएगी।

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Posted By: Rahul Sharma

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