माले। जेल की सजा भुगत रहे गंभीर रूप से बीमार मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद सरकारी शर्त की वजह से सर्जरी कराने ब्रिटेन नहीं जा सकेंगे। मालदीव सरकार ने उनके समक्ष शर्त रखी है कि अगर विदेश जाना है तो स्वदेश वापसी सुनिश्चित करने के लिए वह अपने एक रिश्तेदार की गारंटी दें। नशीद ने सरकार की इस शर्त को ठुकरा दिया है। पूर्व राष्ट्रपति के वकील हसन लतीफ ने आखिरी क्षण में थोपी गई सरकार की इस शर्त को गैरकानूनी और एक तरह से परिजनों को बंधक बनाने वाला करार दिया है।

भारत, श्रीलंका और ब्रिटेन के दखल देने के बाद मालदीव पूर्व राष्ट्रपति नशीद को सर्जरी के लिए विदेश जाने की अनुमति देने पर राजी हुआ था। समझौते के तहत उन्हें रविवार शाम को माले से लंदन के लिए रवाना होना था, लेकिन आखिरी समय में रखी गई शर्त के कारण नशीद को यात्रा स्थगित करनी पड़ी। मालदीव के गृह मंत्री उमर नसीर ने कहा कि नशीद को यात्रा की इजाजत तभी दी जाएगी, जब वह बाकी बची सजा भुगतने के लिए अपनी स्वदेश वापसी सुनिश्चित करेंगे और इसके लिए उन्हें एक गांरटर देना होगा। पिछले वर्ष नशीद को आतंकवाद से जुड़े आरोपों में 13 साल कैद की सजा सुनाई गई थी। इस बारे में विदेश मंत्रालय ने भी स्पष्ट किया है कि अगर कोई कैदी इलाज के लिए विदेश जाने की अनुमति मांगता है तो उसके लिए कानूनन यह जरूरी है कि वह अपनी स्वदेश वापसी सुनिश्चित करने के लिए एक शपथ पत्र पर अपने गारंटर के साथ हस्ताक्षर करे। मंत्रालय ने ट्वीट किया कि पूर्व राष्ट्रपति द्वारा सर्जरी के लिए ब्रिटेन जाने से इन्कार करना दुखद है। उन्हें जेल से 30 दिन की छुट्टी दी गई थी। इस पर पूर्व राष्ट्रपति के वकील लतीफ ने कहा, 'सरकार आखिरी समय में समझौते से पीछे हट गई। यह शर्त रख दी कि नशीद के विदेश से लौटने तक उनके परिवार का एक सदस्य माले में ही रहेगा। यह तो बंधक बनाने जैसा है। इस तरह का ब्लैकमेल गैरकानूनी है।' वकील के अनुसार, 'अगर पूर्व राष्ट्रपति समझौते की शर्तो का उल्लंघन करते हैं तब उनके परिजनों को सजा दी सकती है। पहले शर्त लादना अनुचित है।'

Posted By: Gunateet Ojha