राज्य ब्यूरो, कोलकाता। प्रवर्तन निदेशायल (ED) द्वारा कोयला तस्करी कांड की जांच के सिलसिले में बंगाल के आठ आईपीएस अधिकारियों को तलब किए जाने को लेकर राज्य के प्रशासनिक खेमे में बेचैनी बढ़ गई है। इन आईपीएस अधिकारियों से पूछताछ के आधार पर कई और लोगों को ईडी द्वारा जिरह के लिए बुलाए जाने का अनुमान है। यह भी देखने वाली बात होगी कि तलब किए गए आईपीएस अधिकारी संकट में घिरने पर किनका नाम लेते हैं।

आठ आइपीएस अधिकारियों को ईडी ने किया तलब

ईडी का दावा है कि ये सभी आईपीएस अधिकारी कोयला तस्करी में लिप्त थे और इनके खिलाफ ईडी के पास पुख्ता प्रमाण हैं। जिन आठ आईपीएस अधिकारियों को स्वतंत्रता दिवस के बाद ईडी के दफ्तर में हाजिर होने को कहा गया है, उनमें ज्ञानवंत सिंह, सुकेश जैन, राजीव मिश्रा, कोटेश्वर राव, श्याम सिंह, तथागत बसु, सेल्वा मुरुगन व भास्कर मुखर्जी शामिल हैं।

ज्ञानवंत सिंह को 22 अगस्त , कोटेश्वर राव को 23 अगस्त , श्याम सिंह को 24, सेल्वा मुरुगन को 25, राजीव मिश्रा को 26, सुकेश जैन को 29, तथागत बसु को 30 और भास्कर मुखर्जी को 31 अगस्त को बुलाया गया है। ईडी ने पिछले साल भी इन आठ में से सात अधिकारियों को तलब किया था।

TMC के भ्रष्य नेताओं ने ममता की मुश्किलें बढ़ाई

ईडी के एक अधिकारी ने बताया कि इन आईपीएस अधिकारियों की कोयला तस्करी कांड में महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इससे उन्हें आर्थिक फायदा भी हुआ है। सूत्रों ने बताया कि ईडी आर्थिक लेन-देन से जुड़े मामलों की जांच करती है और संलिप्तता के पुख्ता सुबूत होने पर ही पूछताछ के लिए तलब करती है। ऐसे में पहले से ही शिक्षक नियुक्ति घोटाले में राज्य के पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी और मवेशी तस्करी कांड में तृणमूल कांग्रेस के बाहुबली नेता अनुब्रत मंडल की गिरफ्तारी को लेकर सवालों के घेरे में फंसी ममता सरकार के लिए मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।

Edited By: Aditi Choudhary