मुजफ्फरपुर/समस्तीपुर, जागरण संवाददाता। मानसून कमजोर होने की वजह से बारिश नहीं हो रही है। तेज धूप की वजह से लोगों की परेशानी बढ़ गई है। बुधवार की सुबह से ही खिली हुई धूप है। आसमान लगभग साफ है। डा. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा के मौसम विभाग तथा एक्यूवेदर की ओर से जारी पूर्वानुमान में आज भी गर्मी से राहत मिलने के संकेत नहीं हैं। पूरे दिन धूप- छांव चलता रहेगा। हवा की दिशा बदलकर पश्चिम हो गई है। आज दिन का अधिकतम तापमान 36 डिग्री के आसपास रहने का अनुमान है। शाम और रात के मौसम में भी खास बदलाव की संभावना नहीं है।

उत्तर बिहार के जिलों में आसमान में बादल छाए रहेंगे। दो दिनों के बाद वर्षा की सक्रियता में वृद्धि हो सकती है। डा. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा के मौसम वैज्ञानिक डा. ए सत्तार ने कहा कि पूर्वानुमान की अवधि में आसमान में हल्के से मध्यम बादल छाए रह सकते हैं। अगले दो-तीन दिनों तक उत्तर बिहार के जिलों में आमतौर पर मौसम के शुष्क रहने की संभावना है। 19 अगस्त के बाद वर्षा में थोड़ी सक्रियता आ सकती है। जिस कारण 20-21 अगस्त को उत्तर बिहार के जिलों के अनेक स्थानों पर वर्षा होने की संभावना है। इस अवधि में अधिकतम तापमान 33 से 35 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है। जबकि न्यूनतम तापमान 25 से 27 डिग्री सेल्सियस के आस-पास रहने का अनुमान है। पूर्वानुमानित अवधि में अगले तीन-चार दिनों तक पछिया हवा तथा उसके बाद पुरवा हवा चलने का अनुमान है। औसतन 10 से 15 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से हवा चलने की संभावना है। सापेक्ष आर्द्रता सुबह में 70 से 80 प्रतिशत तथा दोपहर में 45 से 55 प्रतिशत रहने की संभावना है।

अरहर की बुआई के लिए तैयार करें खेत

किसानों के जारी समसामयिक सुझाव में कहा गया है कि धान की फसल जो 20-25 दिन की हो गई हो, उसमें प्रति हेक्टेयर 30 किलोग्राम नेत्रजन का उपरिवेशन करें। अगात बोई गई धान की फसल में तना छेदक कीट की निगरानी करें। सितम्बर में अरहर की बुआई के लिए खेत की तैयारी करें। 25 अगस्त के बाद इसकी बुआई कर सकते हैं। बुआई के समय प्रति हेक्टेयर 20 किलोग्राम नेत्रजन, 45 किलोग्राम स्फुर, 20 किलोग्राम पोटाश तथा 20 किलोग्राम सल्फर का व्यवहार करें। अरहर की पूसा-9 तथा शरद प्रभेद उत्तर बिहार के लिए अनुशंसित है। बुआई के 24 घंटे पूर्व 2.5 ग्राम थीरम दवा से प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचार करें। बुआई के ठीक पहले उपचारित बीज को उचित राईजोबियम कल्चर से उपचारित कर बुआई करनी चाहिए। 

Edited By: Ajit Kumar