संवाद सहयोगी, किशनगंज : एनीमिया मुक्त भारत अभियान जिला में चलाया जाएगा। इसके लिए जिले के एक चिकित्सक और सामुदायिक समन्वयक को पटना में प्रशिक्षण दिया गया। इनमें जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डा. देवेन्द्र कुमार और जिला सामुदायिक समन्वयक सुमन सिन्हा शामिल हैं। यह बातें सिविल सर्जन डा. कौशल किशोर ने दी। उन्होंने बताया कि पोलियो मुक्त भारत सहित अन्य कार्यक्रमों में स्वास्थ्य विभाग ने लक्ष्य हासिल किया। इसी तरह एनीमिया मुक्त भारत बनाने के लिए समन्वय बना कर काम करने की जरूरत है। एनीमिया के चलते मातृ-शिशु मृत्यु बढ़ जाता है। स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग व आइसीडीएस के साथ मिलकर गर्भवती, धातृ माता और किशोर एवं किशोरियों को आयरन की गोली खिलायी जा रही है। देखा जाए तो एनीमिया एक गंभीर लोक स्वास्थ्य समस्या है। इससे जहां शिशुओं का शारीरिक एवं मानसिक विकास अवरुद्ध होता है। वहीं किशोरियों एवं माताओं में कार्य करने की क्षमता में भी कमी आ जाती है। इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए राष्ट्रीय पोषण अभियान के अंतर्गत एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम की शुरुआत की गई है। देश के सभी राज्यों में इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम को संचालित किया जा रहा है।

जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डा. देवेन्द्र कुमार ने बताया की एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम के तहत सभी छह आयु वर्ग के लोगों में एनीमिया रोकथाम की कोशिश की जा रही है। जिसमें छह से 59 महीने के बालक और बालिकाओं को हफ्ते में दो बार आइएफए की एक मिली सिरप आशा कार्यकर्ता द्वारा माताओं को नि:शुल्क दी जाती है। पांच से नौ साल के लड़के और लड़कियों को हर सप्ताह आइएफए की एक गुलाबी गोली दी जाती है। यह दवा प्राथमिक विद्यालय में प्रत्येक बुधवार को मध्याह्न के बाद शिक्षकों के माध्यम से निशुल्क दिए जाते हैं। साथ ही पांच से नौ साल तक के वैसे बच्चे जो किसी कारणवश स्कूल नहीं जाते हैं। उन्हें आशा गृह भ्रमण के दौरान उनके घर पर आइएफए की गुलाबी गोली देती हैं। 10 से 19 साल के किशोर और किशोरियों को हर हफ्ते आइएफए की एक नीली गोली दी जाती है। जिसे विद्यालय एवं आंगनबाड़ी केंद्रों पर प्रत्येक बुधवार को भोजन के बाद शिक्षकों एवं आंगनबाड़ी सेविका के माध्यम से निशुल्क प्रदान की जाती है।

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