आगरा, अम्बुज उपाध्याय। परिवार के साथ जमे हुए कारोबार को पाकिस्तान के चिन्होट से छोड़कर कर आगरा पहुंचे स्वर्गीय शांति स्वरूप मगन श्राफ जब विभाजन का दर्द परिवार को सुनाते थे तो दर्द से कराह जाते थे। बेटे राजेश मगन बताते हैं कि खेती बाड़ी और सर्राफ का काम उजड़ गया तो पिता जो साथ लेकर चले थे उसे बार्डर पर लूट लिया गया।

खाली हाथ कुछ दिन पंजाब में शिविर में गुजारे तो उसके बाद तीन भाइयों के साथ आगरा आ गए। पहले शिविर फिर मोती कटरा क्षेत्र में रहे, जिस बीच संयुक्त परिवार ने लेदर को पहुंचाने का काम किया तो फिर लेदर का व्यापार करने लगे। आज शू कंपोनेंट क्षेत्र में श्राफ ग्रुप का बड़ा नाम है तो औद्यौगिक क्षेत्र में तीन इकाई हैं।

श्रॉफ सेल्स के संस्थापक स्व. शांति स्वरूप मगन। फाइल फोटो

श्राफ ग्रुप के चेयरमैन राजेश मगन बताते हैं कि बड़े भाई अनिल मगन, मंझले भाई सुशीन मगन और उनके साथ दो बहनों का जन्म आगरा में ही हुआ है। पिता बताते थे कि माहौल ऐसा बिगड़ा था कि लोग सामान नहीं, सिर्फ जान बचाने के लिए मीलों पैदल चलते थे। भारत आकर जहां शिविर मिले वहां राहत थी। आगरा में संघर्ष की शुरुआत की और छोटे काम से परहेज नहीं किया।

भाइयों के संयुक्त बल और प्रबल इच्छा शक्ति ने आगे बढ़ने में मदद की और हींग की मंडी क्षेत्र में वर्ष 1972 में शू कंपोनेंट शोरूम की शुरुआत की। ये तो आज संचालित है और वर्तमान में सिकंदरा औद्यौगिक क्षेत्र तीन इकाइयां संचालित हैं। राजेश मगन ने बताया कि पिता शांति स्वरूप वर्ष 2016 और मां सत्यदेवी वर्ष 2019 में साथ छोड़ गए, दोनों की आयु 95 वर्ष थी। राजेश मगन के बेटे सौरभ सहित भाई अनिल, सुशील के बेटे भी अब कारोबार संभाल रहे हैं। दिल्ली, कोलकाता में भी अब कंपनी के ट्रेडिंग आफिस हैं।

Edited By: Prateek Gupta