जागरण संवाददाता, हल्द्वानी : देशभर के विश्वविद्यालयों को अब अपने यहां संचालित बौद्ध धर्म से संबंधित विषयों, बौद्ध शोधार्थियों, पाली शोधार्थियों समेत एलुमिनाई और सेमिनारों का डाटा जुटाना होगा। इस डाटा को दस मार्च तक केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय को उपलब्ध कराना होगा।

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के सचिव प्रो. रजनीश जैन ने सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को पत्र जारी किया है। जिसमें उन्होंने बताया कि भारत सरकार देश को बौद्ध धर्म के ग्लोबल कल्चर और टूरिज्म के ग्लोबल सेंटर  के तौर पर विकसित कर रही है। जिसके तहत बौद्ध धर्म की संस्कृति, उससे जुड़े इतिहास आदि को सहेजकर डाटाबेस तैयार किया जा रहा है।

इसी क्रम में भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय ने सभी विश्वविद्यालयों से बौद्ध धर्म पर आधारित विषयों, शोधार्थियों, एलुमिनाई का डाटा मांगा है। इतना ही नहीं विश्वविद्यालयों को अपने यहां बौद्ध धर्म पर आधारित सेमिनारों, कांफ्रेंस और कान्क्लेव के आयोजन की भी जानकारी देनी होगी। सचिव प्रो. जैन ने सभी विश्वविद्यालयों से बौद्ध धर्म से संबंधित सभी तरह का डाटा तैयार करने को कहा है। इस डाटा को विश्वविद्यालयों द्वारा दस मार्च तक अपलोड करना होगा।

फैकेल्टी मिले तो डिप्लोमा कोर्स शुरू करेंगे

उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. ओपीएस नेगी ने भारत सरकार की इस पहल को सराहा है। उनका कहना है कि यदि यूओयू को बौद्ध धर्म से संबंधित विषयों के पठन-पाठन के लिए फैकेल्टी मिल जाती है तो इसका डिप्लोमा कोर्स शुरू करने पर विचार किया जा सकता है।

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