जासं, हाथरस : बूलगढ़ी में 14 सितंबर को क्या हुआ, हमला किसने किया? जैसे सवालों का जवाब करीब डेढ़ महीने से चल रही जांच में अभी सीबीआइ को नहीं मिल सका है। इस कांड का सच अब पॉलीग्राफ और ब्रेन इलेक्ट्रिकल ऑसिलेशन सिग्नेचर (बीईओएस)टेस्ट से तलाशने की कोशिश की जा रही है। इसके लिए चारों आरोपितों को गुजरात ले जाने के बांद गांव में खलबली मची हुई है। कुछ लोगों में सीबीआइ के कसते शिकंजे से घबराहट भी है। तेजी से बढ़ती जांच के चलते जल्द ही पर्दाफाश की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि 25 नवंबर को हाईकोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट सौंपी जानी है।

सीबीआइ इस मामले की 11 अक्टूबर से जांच कर रही है। इससे पहले एसआइटी जांच शुरू हुई थी, जिसका गठन सीएम ने किया था। साथ ही नार्को व पॉलीग्राफ टेस्ट के लिए भी आदेश दिया था, लेकिन बढ़ते हंगामे को देखते हुई सरकार ने सीबीआइ जांच का निर्णय ले लिया। यह टीम अब तक पचास लोगों से पूछताछ कर चुकी है। शनिवार को चारों आरोपितों को गुजरात ले जाने की खबर गांव में रविवार को पहुंची। इसके बाद चर्चाएं शुरू हो गईं। माना जा रहा है कि अब छोटू और घटना से जुड़े अन्य लोगों का भी टेस्ट कराया जा सकता है। माना जा रहा है कि अब घटना का सच जल्द ही सामने आएगा। दूसरे पक्ष का भी पॉलीग्राफ टेस्ट चाहते हैं आरोपितों के स्वजन

आरोपितों को गुजरात ले जाने की जानकारी उनके स्वजन को नहीं थी। हालांकि, वे इस जांच के लिए शुरू से ही कह रहे थे। आरोपितों के पिता का कहना था कि कोई भी जांच करा लें। हर टेस्ट के लिए तैयार हैं, लेकिन मृतका के स्वजन का भी नार्काे टेस्ट कराया जाए। आरोपित रवि के पिता अतर सिंह, संदीप के पिता नरेंद्र उर्फ गुड्डू और रामू के पिता राकेश सिंह ने कहा है कि उन्हें पॉलीग्राफ या बीईओएस टेस्ट के बारे में कोई जानकारी नहीं है। न ही उनसे कोई सहमति सीबीआइ ने ली है, फिर भी उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। नाबालिग आरोपित के पिता ने कहा कि सच्चाई के लिए हर टेस्ट के लिए राजी हैं। टेस्ट को राजी नहीं मृतका के स्वजन

दो अक्टूबर को एसआइटी की पहली जांच रिपोर्ट पर मुख्यमंत्री ने एसपी समेत पांच पुलिसकर्मियों को निलंबित किया था। इसके साथ ही वादी-आरोपित, पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों के नार्को, पॉलीग्राफ टेस्ट कराने के निर्देश दिए थे। पीड़िता के स्वजन नार्काे टेस्ट को लेकर शुरू से ही तैयार नहीं हैं। मृतका के पिता कह चुके हैं उनकी बेटी चली गई, उनका ही टेस्ट कराने की बात क्यों कही जा रही है? परिवार का कोई भी सदस्य टेस्ट नहीं कराएगा। मृतका के भाइयों ने आरोपितों के साथ-साथ अधिकारियों के भी पॉलीग्राफ टेस्ट कराने की मांग उठाई थी। रविवार को मृतका के स्वजन मीडिया से दूर रहे। छोटू के स्वजन भी टेस्ट

से कर चुके हैं इन्कार

घटनास्थल पर सबसे पहले पहुंचने का दावा करने वाले विक्रांत सिसौदिया उर्फ छोटू की मां और भाई भी टेस्ट कराने को राजी नहीं है। मां ने छोटू के नाबालिग होने का दावा किया है। वहीं छोटू भी कह चुका है कि पहले आरोपित और मृतका के स्वजन का पॉलीग्राफ टेस्ट हो।

मृतका का छोटा भाई आज से देगा आइटीआइ की परीक्षा

सोमवार को मृतका का छोटा भाई आइटीआइ सेमेस्टर की परीक्षा देगा। इसके चलते वह रविवार को वह चंदपा स्थित कॉलेज में प्रवेश पत्र लेने गया था। उसके साथ सीआरपीएफ की गाड़ी दो जवानों को लेकर गई थी। परीक्षा सुबह साढ़े नौ बजे से दोपहर साढ़े 12 बजे तक होगी। इस दौरान सीआरपीएफ का पहरा रहेगा।

पॉलीग्राफ व बीईओएस टेस्ट से साफ हो सकती है बूलगढ़ी कांड की तस्वीर

जासं, हाथरस : बूलगढ़ी मामले में आरोपितों के पॉलीग्राफ और बीईओएस टेस्ट से इस घटनाक्रम की तस्वीर साफ होने की उम्मीद है। टेस्ट की रिपोर्ट और सीबीआइ की विवेचना के आधार पर ही सच से पर्दा उठ सकेगा। माना जा रहा है कि इस मामले में अन्य लोगों के भी पॉलीग्राफ टेस्ट कराया जा सकता है।

जानकारों की मानें तो चारों आरोपितों की जांच और रिपोर्ट की प्रकिया में तीन-चार दिन का समय लग सकता है। पॉलीग्राफ टेस्ट रिपोर्ट 60 फीसद तक विश्वसनीय मानी जाती है। वहीं बीईओएस टेस्ट उससे कुछ अधिक विश्वनीय होता है। टेस्ट की रिपोर्ट के साथ सीबीआइ चार्जशीट कोर्ट में दाखिल करेगी। अगर टेस्ट की रिपोर्ट और सीबीआइ की विवेचना एक ही दिशा में होती हैं तो बूलगढ़ी प्रकरण को लेकर निर्णय के लिए यह अहम होगा। पॉलीग्राफिक टेस्ट की प्रकिया

पॉलीग्राफिक टेस्ट में विशेषज्ञ कंप्यूटर की स्क्रीन पर ग्राफ का अध्ययन करते हैं।

सेंसर के अधार पर सवाल पूछने के दौरान आरोपित की हार्ट बीट-पल्स रेट देखते हैं।

सांसों की गति को देखते हैं, झूठ बोलने पर सांस की गति असामान्य होने लगती हैं।

ब्लड प्रेशर को भी देखते हैं, ब्लड प्रेशर कम या ज्यादा होने से ग्राफ मूव करता है।

झूठ बोलते समय व्यक्ति की उंगली या हाथ में पसीना आता है। इस पर भी ध्यान दिया जाता है।

बीईओएस टेस्ट

व्यक्ति के सिर पर एक हेलमेट जैसी मशीन लगाई जाती है।

इस मशीन से मनोस्थिति को मॉनीटर पर रीड किया जाता है।

टेस्ट देने वाला व्यक्ति झूठ बोलता है तो मॉनीटर का ग्राफ ऊपर-नीचे होने लगता है।

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