संवाद सहयोगी, विकासनगर: तिमली वन रेंज के जंगल से निकलकर रामपुर मंडी के वन आरक्षी प्रशिक्षण केंद्र के जंगल में डेरा जमाए हाथियों की चारों ओर से सख्त घेराबंदी की जा रही है, ताकि हाथी आबादी क्षेत्र में न चलें जाएं। हाथियों के हर मूवमेंट पर नजर रखने के साथ उन्हें किसी भी तरफ निकलने से रोका जा रहा है। हाथियों के मूवमेंट को आबादी की ओर जाने से रोकने के लिए जिस प्रकार से तेज आवाज वाले पटाखे व शोर मचाने जैसी कवायद की जा रही है, उससे हाथियों के उग्र होने की आशंका भी बढ़ रही है। करीब एक साल से तिमली रेंज में रह रहे दोनों टस्कर शांत स्वभाव से रह रहे हैं। इतने लंबे समय में हाथियों ने किसी व्यक्ति को अब तक नुकसान नहीं पहुंचाया है।

रामपुर मंडी स्थित जंगल में शरण लिए दोनों हाथियों पर चकराता वन प्रभाग व ग्रामीणों का सख्त पहरा है। बताते चलें कि वन रक्षक प्रशिक्षण केंद्र के जिस जंगल में फिल्हाल हाथी मौजूद हैं, उसका एक सिरा लोहे की तारबाड़ से घिरा हुआ है। इसके अलावा जंगल के एक किनारे पर कालसी वन प्रभाग की तिमली रेंज, दूसरे पर चकराता वन प्रभाग की रामपुर मंडी आसन रेंज व तीसरे सिरे पर हिमाचल प्रदेश का वन विभाग है। हाथी हालांकि दिनभर जंगल में शांति के साथ रह रहे हैं। परंतु रात के समय उनकी चहलकदमी होती है। दरअसल समस्या उनकी चहल कदमी के साथ ही वन टीमों की कवायद भी है। वह जिस तरफ भी बढ़ते हैं, उसी दिशा से ग्रामीण व वन विभाग के कर्मचारी शोर मचाकर या तेज आवाज वाले पटाखे चलाकर हाथियों को वापस लौटाने का प्रयास करते हैं। जबकि अभी तक हाथियों के उग्र होकर किसी वनकर्मी या ग्रामीण पर हमला करने की घटना सामने नहीं आई है। परंतु जानकार मानते हैं यदि हाथियों के साथ सख्ती बरती गई तो वे आक्रामक भी हो सकते हैं। कालसी वन प्रभाग के डीएफओ श्रीप्रकाश शर्मा का कहना है कि हाथियों को शांति से अपनी चहलकदमी जारी रखने देनी चाहिए। जिससे वह जहां से आए हैं तिमली रेंज के जंगल में वापस पहुंच जाएं। उनके मार्ग में अवरोध पैदा करना, अत्यधिक पटाखे चलाना या शोर शराबा करना व उनके पास जाकर फोटो खींचने जैसी गतिविधियों से हाथी हमालवर हो सकते हैं। उन्होंने ग्रामीणों से वन विभाग को अपने हिसाब से कार्रवाई करने देने की अपील भी की है।

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