संवाद सहयोगी, ललमटिया (गोड्डा): आदिवासियों के प्रेम और भाईचारे का त्योहार सोहराय ललमटिया क्षेत्र के विभिन्न आदिवासी गांव में धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है । सोहराय के अवसर पर बसडीहा ,बड़ा सिमरा ,बड़ा भोड़ाय और लोहंडिया बस्ती में गुरुवार को आदिवासी समुदाय की महिला और पुरुष सहित बच्चे व बूढ़ों ने मिलकर पारंपरिक नृत्य करते हुए त्योहार का आनंद उठाया। आदिवासी महिला पुरुष मांदर, डग्गा ,झांझर ,केसियो बजाते हुए पारंपारिक आदिवासी परिधान पहनकर गांव के उत्तरी छोर से नृत्य करते हुए पूरे गांव का भ्रमण किया । मान्यता के अनुसार सोहराय पर्व में प्रकृति की पूजा की जाती है। छह दिनों तक चलने वाले इस त्योहार में अलग-अलग दिनों में लोग अलग-अलग उत्सव मनाते हैं।

लोहंडिया पंचायत के पंचायत समिति सदस्य मंजू चौड़े ने बताया कि सोहराय आदिवासियों का महत्वपूर्ण त्योहार है । इस त्योहार में प्रकृति की पूजा के साथ साथ पशुओं की भी पूजा की जाती है। यह त्योहार आपसी भाईचारे और सद्भावना का है। यह त्योहार प्रकृति से प्रेम सिखाता है। आदिवासी सभ्यता और संस्कृति इस पर्व से झलकती है। लोग एक दूसरे के पुराने गिले - शिकवे को भूलकर मिलते हैं। साथ बैठ कर और खा पीकर पर्व का आनंद लेते हैं। इस त्योहार में भाई अपनी बहन को निमंत्रण देकर अपने घर में आमंत्रित करते हैं। इसलिए इसे भाई बन का भी त्योहार कहा जाता है। गांव समाज के सभी लोग मिलजुलकर पर्व का आनंद उठाते हैं। मौके पर प्रेमलाल किस्कू, प्रवीण किस्कू, अनीता किस्कू, लखन किस्कू के अलावा दर्जनों आदिवासी ग्रामीण उपस्थित थे।

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