जागरण संवाददाता, हाथरस: बूलगढ़ी काड के चारों आरोपितों का सीबीआइ पॉलीग्राफ और ब्रेन इलेक्ट्रिकल ऑसिलेशन सिग्नेचर (बीईओएस) टेस्ट कराएगी। इसके लिए चारों को पुलिस अलीगढ़ जेल से गाधी नगर (गुजरात) ले गई है। इनमें एक नाबालिग है। 25 नवंबर तक सीबीआइ को अब तक की जाच की स्टेटस रिपोर्ट भी हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में प्रस्तुत करनी है। इसके आदेश के बाद से ही सीबीआइ ने जाच तेज कर दी थी।

युवती पर 14 सितंबर को हमला हुआ था। तब स्वजन ने गाव के ही संदीप ठाकुर के खिलाफ जानलेवा हमले का मुकदमा दर्ज कराया था। इसे 19 सितंबर को पुलिस ने जेल भेज दिया था। 22 सितंबर को अलीगढ़ के जवाहर लाल नेहरू (जेएन) मेडिकल कॉलेज में पीड़िता के 161 के बयानों के आधार पर इस मामले में धाराएं बढ़ाते हुए गाव के ही रवि, रामू और एक अन्य आरोपित को भी नामजद किया गया। बाद में एक आरोपित के नाबालिग होने की जानकारी हुई थी, जिसे 23 सितंबर को जेल भेजा गया था। 25 सितंबर रवि और 26 को रामू को जेल भेजा गया। 29 सितंबर को युवती की दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में मौत के बाद देशभर में बवाल मचा। मुख्यमंत्री ने एसआइटी गठित कर वादी-प्रतिवादी, अधिकारियों के नार्को व पॉलीग्राफ टेस्ट कराए जाने का आदेश दिए थे। लेकिन, 11 अक्टूबर से सीबीआइ ने जाच शुरू कर दी। पिछले करीब बीस दिन से टीम स्टेटस रिपोर्ट की तैयारी में लगी है। इसके लिए नक्शा तैयार किया गया है। सीन रीक्रिएशन कराया गया है।

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कोर्ट ने दी है अनुमति

पॉलीग्राफ और बीइओएस टेस्ट कराने की अनुमति हाथरस के विशेष न्यायालय एससी-एसटी एक्ट से मिली है। इसके लिए सीबीआइ ने एक सप्ताह से प्रयास कर रही थी। शनिवार शाम पुलिस अलीगढ़ जेल पहुंची। वरिष्ठ जेल अधीक्षक आलोक सिंह ने बताया हाथरस पुलिस की सुरक्षा में चारों आरोपितों को गाधीनगर भेजा गया है। इस दौरान अगर आरोपितों को कुछ दिन वहा रुकना पड़ा तो उन्हें गाधी नगर की जेल में ही रखा जाएगा। अदालत ने आदेश में इस बात का उल्लेख है।

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क्या है पालीग्राफ व बीइओएस टेस्ट

पॉलीग्राफ एक ऐसी मशीन है जिसका प्रयोग झूठ पकड़ने के लिए किया जाता है। इसमें कई चीजों को परखा जाता है। जैसे व्यक्ति कि हर्ट रेट, ब्लड प्रेसर आदि। यदि व्यक्ति झूठ बोलता है तो इन तत्वों के अंदर बदलाव होता है। जिसके आधार पर यह तय किया जाता है कि व्यक्ति सच है या झूठ । इसके अलावा एड्रेनालाईन हार्मोन की वजह से भी व्यक्ति की बोड़ी के अंदर बदलाव आते हैं। इसी तरह बीइओएस टेस्ट में सिर में यंत्र लगाकर व्यक्ति के दिमाग के ग्राफ को देख सच व झूठ पता लगाने में कोशिश की जाती है।

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