जागरण संवाददाता, वाराणसी : एक महिला को जिस दिन मोनू चौहान ने गोली मारी उसी दिन से उसकी उल्टी गिनती शुरू हो गई थी। पुलिस भी उसके पीछे ऐसे पड़ी कि उसे मार कर ही राहत की सांस ली। दीपावली के एक दिन पूर्व लालपुर -पांडेयपुर थाना क्षेत्र के गोइठहां में घड़ी व्यवसायी श्याम बिहारी मिश्र को गोली मारकर 20 हजार लूटने के बाद पुलिस अपराधियों को खंगाल रही थी कि तभी 10 हजार रुपये के विवाद को लेकर मोनू ने ई रिक्शा चालक आजाद को लक्ष्य कर गोली मारी लेकिन बीच में आई उसकी पत्नी प्रेमा को गोली लग गई। इसके बाद पुलिस उसके पीछे हाथ धोकर पड़ गई। आखिर पुलिस मुठभेड़ में पुलिस ने उसका अध्याय समाप्त कर दिया। उसके पास वह बैग भी बरामद हुआ जिसे उसने घड़ी व्यवसायी श्याम बिहारी मिश्र के पास से लूटा था। बैग में एटीएम कार्ड, कागजात व एक सुलहनामा मिला है। सनी के मारे जाने के बाद सुर्खियों में आया मोनू : कक्षा आठ पास मोनू पहले चाट बेचता था। वह उस समय सुर्खियों में आया जब 26 जुलाई 2015 को जगतगंज स्थित मनोज बजाज के कार्यालय में घुसकर 27 लाख रुपये और आभूषण की लूट की घटना हुई। 29 जुलाई 2015 की रात सनी का एसटीएफ ने एनकाउंटर कर दिया था लेकिन मोनू चौहान अंधेरे का फायदा उठाकर महिला अस्पताल की चहारदीवारी फांदकर भाग गया था।

13 फरवरी 2015 को सुंदरपुर नेवादा स्थित गणेश धाम कालोनी में प्रापर्टी डीलर मुन्ना सिंह की हत्या में भी मोनू चौहान का नाम था। 20 जून 2017 को शिवपुर पुलिस ने उसे रेलवे क्रासिग के पास हल्की मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया था। जमानत पर छूटने के बाद वह फरार था।

भूमि विवाद के बाद चाचा से हो गया था अलग : स्व. हरिहर चौहान का पुत्र मोनू चौहान चोलापुर थाना क्षेत्र के लाखी गांव का मूल निवासी था। बचपन में ही पिता का साया उसके सिर से उठ गया था। वर्तमान में वह माता व पत्नी के साथ खजुरी-पांडेयपुर में किराए के मकान में रहता था। लगभग तीन वर्ष पूर्व चाचा पुनवासी के साथ भूमि विवाद कर उसने अपना बंटवारा कर लिया था। पांडेयपुर में रहने के साथ ही वह कभी-कभी लाखी स्थित अपने पुश्तैनी घर पर आता-जाता रहता था। ग्रामीणों के मुताबिक वह महीने में एक या दो बार ही आता था। कुछ घंटे या एक-दो दिन रहकर वह वापस लौट जाता था।

मडुआडीह की संजू कुमारी के नाम बाइक : मोनू चौहान के मुठभेड़ में मारे जाने के बाद उसकी बाइक की पहचान मंडुआडीह थाना क्षेत्र के मड़ौली निवासी संजू कुमारी के नाम कागजात से हुई। बाइक का पंजीयन पांच अप्रैल-2018 को हुआ था। इंश्योरेंस फेल है। दस माह बाद पुलिस को मिली बड़ी कामयाबी :

जागरण संवाददाता, वाराणसी : ताबड़तोड़ संगीन वारदातों के क्रम में करीब दस माह बाद पुलिस को उस समय बड़ी कामयाबी हासिल हुई जब मोनू चौहान को मार गिराया गया। इससे पहले गत फरवरी माह में एसटीएफ से मुठभेड़ में एक लाख का इनामी शातिर बदमाश राजेश दुबे उर्फ टुन्ना सारनाथ के सिंहपुर रोड पर मारा गया था। फायरिग में एसटीएफ का जवान भी गोली लगने से घायल हुआ था। गाजीपुर के नंदगंज के अलीनगर निवासी राजेश चंदौली और गाजीपुर में कई हत्याओं और लूट के मामलों में उसकी तलाश थी। 2012 में निर्माण निगम गोलीकांड से वह चर्चा में आया था। उस समय उस पर 25 हजार का इनाम घोषित हुआ था। वह 30 अगस्त 2017 को गाजीपुर में गैंगस्टर कोर्ट में पेशी के बाद हवालात से फरार हो गया था। पत्रकार राजेश मिश्रा हत्याकांड में राजेश दुबे नामजद हुआ था। इससे पहले 29 जुलाई 2015 को कुख्यात बदमाश सनी सिंह को वाराणसी एफटीएफ ने कबीरचौरा अस्पताल के पास मुठभेड़ में ढेर किया था। इससे पहले कुख्यात बदमाश हेमंत मौर्य को 7 मार्च 2014 को भेलूपुर पुलिस ने कमच्छा शराब ठेके के पास ढेर किया था। पांच जून 2010 को उस समय अपराधियों के काल के रूप में विख्यात गिरजाशंकर त्रिपाठी (तत्कालीन एसओजी प्रभारी) की टीम के साथ हुई मुठभेड़ में डेढ़ लाख का इनामी संतोष गुप्ता उर्फ किट्टू अपने एक साथी के साथ तेलियाबाग-चौकाघाट मार्ग पर हुई मुठभेड़ में मारा गया था।

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