संस, मोगा : गीता भवन ट्रस्ट की प्रापर्टी को लेकर छिड़े विवाद व स्वामी कमलपुरी जी महाराज पर हत्या की आशंका में हरिद्वार में दी गई शिकायत के बाद जूना अखाड़े के स्वामी सहज प्रकाश के निमित गीता भवन में रखे गए शांति पाठ में रविवार को संतों ने दूरी बना ली, न स्वामी कमलपुरी जी महाराज पहुंचे न ही हरिद्वार से स्वामी चिन्यमयानंद जी पहुंचे। हालांकि स्वामी कमल पुरी जी महाराज मोगा में ही थे। वे दोपहर में गांधी रोड स्थित गोशला में गोपाष्टमी पर आयोजित कार्यक्रम में पहुंचे थे। सिर्फ तीन संत ही शांति पाठ में मौजूद थे, जिनमें से दो हरिद्वार के पावन धाम में सेवा दे रहे संत थे, जबकि तीसरे संत के रूप में दिल्ली महानिर्माणी अखाड़ा के महामंडलेश्वर चन्द्रशेखरानंद जी पहुंचे।

गौरतलब है कि जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर व गीता भवन ट्रस्ट के चेयरमैन रहे स्वामी सहजप्रकाश जी लगभग दो महीने की बीमारी के बाद 14 अप्रैल को चिर निद्रा में विलीन हो गए थे। उसके बाद से ही प्रापर्टी को लेकर विवाद शुरू हो गया था, क्योंकि बीमारी के दिनों में ही स्वामी सहज प्रकाश ने ट्रस्ट की प्रापर्टी की वसीयत दो साध्वियों के नाम कर दी थीं, ये साध्वियां पहले सिरसा डेरे की सेवादार थीं, बाद में यहां आ गई थीं हालांकि स्वामी सहज प्रकाश के कोरोना के चलते उनके फेफड़े डैमेज हो गए थे। बीमारी के उन्हीं दिनों में उन्होंने वसीयत की थी। वसीयत के दौरान स्वामी कमलपुरी जी महाराज ने गवाही दी थी, तभी से स्वामी कमलपुरी जी महाराज गीता भवन ट्रस्ट के निशाने पर थे। शांति पाठ से एक दिन पहले ही उनके खिलाफ हरिद्वार में एसएसपी के आफिस में लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया था कि आशंका है कि बीमारी के दिनों में प्रापर्टी पर कब्जे की नीयत से स्वामी सहज प्रकाश की हत्या स्वामी कमलपुरी जी महाराज व दोनों साध्वियों ने कर दी है।

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