जासं, महोबा : गोपाष्टमी पर क्षेत्र में कई स्थानों पर गायों की विधिविधान से पूजा की गई। लोगों ने रोली और हल्दी का तिलक कर उन्हें मिष्ठान तथा हरा चारा भी खिलाया गया। इससे पूर्व गाय-बछड़े को स्नान करने के बाद उनकी आरती उतारी गई।

गोपाष्टमी पर गो माता की पूजा की जाती है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने गाय चराने की लीला का प्रारंभ किया था। शुरू की थी। कार्तिक शुक्ल पक्ष अष्टमी को गोपाष्टमी का यह पर्व पूरे उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन घरों में माताएं, बहनें बछड़े सहित गाय का पूजन करती हैं। रविवार को सबसे पहले गाय और बछड़ों को स्नान कराया गया। इसके बाद गो माता के अंगों में मेहंदी, रोली की हाथ से थाप लगाई गई। धूप, दीप, पुष्प, अक्षत और रोली से पूजन करने के बाद गुड़, जलेबी, वस्त्र और जल से गो की पूजा की गई। इस अवसर पर गोपाष्टमी का पर्व जैतपुर में भी मनाया गया। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि मौला बख्श द्वारा गोशाला में जाकर गायों की पूजा की गई। उन्हें गुड़ व चना खिलाया। मुख्यालय के साथ क्षेत्रों में भी गोपाष्टमी पर गाय-बछड़े की पूजा की गई। डीएम ने की गायों की पूजा

गोपाष्टमी पर रविवार को अरुणोदय संस्थान की ओर से गो कृषि संरक्षण यात्रा का आयोजन किया गया। यात्रा का शुभारंभ जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने रामकुंड स्थित गोशाला से हरी झंडी दिखाकर किया। इस आयोजन के लिए डीएम ने संस्थान की प्रशंसा की।

डीएम ने कहा, पशुओं के नस्ल सुधार तकनीक के प्रति समाज को जागरुक करने की जरूरत है। उन्होंने गाय के अप्रत्यक्ष लाभ को जन जन तक पहुंचाने की बात कही। गो कृषि संरक्षण यात्रा के प्रभारी ज्ञान सिंह ने बताया कि ये यात्रा सात दिनों में जिले के 72 गांवों का अच्छादन करेगी।

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