सुभाष शर्मा, नंगल: भारतीय संस्कृति के विशेष पर्व माने जाते मकर संक्राति पर वीरवार को इलाके में जगह-जगह धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। आस्था में लीन श्रद्धालुओं ने बिभोर साहिब के निकट सतलुज नदी से बनी झील में स्नान करने के बाद किश्तियों में बैठे मल्लाह को दान सामग्री अर्पित कर पूजा की। लोगों ने झील में सूर्यदेव को अ‌र्घ्य देकर सुख- समृद्धि की कामना की। तड़के से ही स्नान के महत्व को समझते हुए इलाके के ही नहीं, बल्कि दूर-दराज से आए लोगों ने पूजा अर्चना की। हरियाणा के अंबाला शहर से आए राज कुमार शर्मा, पंचकूला के अशोक कुमार व मोहाली से आए मदन लाल ठाकुर ने बताया कि वह अपने बुजुगरें की पुरानी परंपरा पर चलते हुए ही यहा परिवार के साथ हर बार मकर संक्राति पर पूजा अर्चना के लिए पहुंचते हैं। बता दें कि इस दिन सूर्य देव के दक्षिण दिशा की ओर प्रस्थान शुरू करने के मद्देनजर ही पूजा अर्चना करना विशेष माना जाता है। इसी परंपरा को जारी रखते हुए इस बार भी मकर संक्रांति पर दान पुण्य करने के बाद लोगों ने किश्ती में बैठकर वरुण देव को सामग्री अर्पित कर सुख- समृद्धि की कामना की। दान के महत्व के मद्देनजर भक्तों ने पानी में तैर रहे पक्षियों के साथ-साथ मछलियों को भी आटा डाला।

सतलुज के तट पर ही ब्रह्मा जी ने की थी तपस्या मान्यता के अनुसार देवों के देव महादेव भगवान शकर की नगरी कैलाश मानसरोवर से आने वाली सतलुज नदी से बनी नंगल डैम झील से पहले ही हंडोला में प्राचीन ब्रह्महुति मंदिर स्थित है। माना जाता है कि गहरे पानी के बीच प्राचीन काल समय से यहां पर सोने की ढाई सीढि़या मौजूद हैं। यहा सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा जी ने लंबे समय तक घोर तपस्या की थी। द्वापर युग में पाडवों ने भी बनवास का अज्ञात काल यहा बिताकर कई अनुष्ठान किए थे। इसी पारंपरिक मान्यता के चलते यहा मकर संक्राति के दिन हजारों लोग पहुंचते हैं। बुजुगरें के अनुसार यहा स्नान करने के बाद दान करने से सुख समृद्धि मिलने सहित दुखों व बीमारियों से मुक्ति भी मिलती है।

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