देहरादून, [जेएनएन]: चौबीस घंटों से हो रही बारिश ने राज्य में जिंदगी की रफ्तार मंद कर दी है। तमाम चुनौतियां बारिश साथ लेकर आई है। नदी-नालों का वेग डराने लगा है। चारधाम के साथ ही कैलास मानसरोवर यात्रा मार्ग अवरुद्ध हैं। मार्ग बाधित होने के चलते बदरीनाथ जाने वाले 500 यात्रियों को विभिन्न पड़ावों पर रोक दिया गया है, जबकि केदारनाथ यात्रा लिनचोली में दोपहर डेढ़ घंटे रोकी गई।
इसी कड़ी में उत्तरकाशी जिले में गोमुख ट्रैक पर 33 कांवडि़ये दस घंटे फंसे रहे। एसडीआरफ की मदद से उन्हें निकाला जा सका। स्थायी और अस्थायी पुलिया बहने की वजह से गंगोत्री नेशनल पार्क प्रशासन ने कांवडिय़ों के गोमुख जाने पर फिलहाल रोक लगा दी है। उत्तरकाशी में भागीरथी खतरे को निशान को पार गई, जबकि हरिद्वार में गंगा चेतावनी रेखा के आसपास बह रही है।



कुमाऊं मंडल में चोरगलिया क्षेत्र में बरसाती नाले के उफान में 35 यात्रियों से भरी बस बह गई। इसमें एक यात्री की मौत हो गई, जबकि दो घायल हो गए। रात उत्तरकाशी में गोशाला पर पेड़ गिरने से एक व्यक्ति की मौत हो गई और दो घायल हो गए। दूसरी तरफ, नदियों में बड़ी मात्रा में सिल्ट आने से बिजली उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ा है।
गंगाजल लेने गोमुख गए कांवडिय़ों का 33 सदस्यीय दल सुबह पांच बजे गंगोत्री वापस लौट रहा था। चीड़बासा के पास नदी पर बनी पुलिया बहने से दल वहीं फंस गया। गंगोत्री से वहां पहुंचे एसडीआरएफ के 10 जवानों ने कांवडिय़ों को नदी के दूसरी तरफ सुरक्षित निकाला। लेकिन तीन किमी आगे चलने पर देव नदी में बनी स्थायी पुलिया बहने से दल के सदस्य फिर से फंस गए। गंगोत्री नेशनल पार्क के कर्मचारियों ने खासी मशक्कत के बाद तीन बजे कांवडिय़ों को देवनदी से सुरक्षित निकाला। दल शाम चार बजे गंगोत्री पहुंचा।

उत्तराखंड में भारी बारिश, देखें तस्वीरें

इस बीच, गंगोत्री से गोमुख के लिए चला कांवड़ के 109 श्रद्धालुओं के दल को देवनदी के पास से वापस लौटना पड़ा। गंगोत्री नेशनल पार्क के रेंज अधिकारी प्रताप सिंह पंवार ने बताया कि भारी बारिश और ट्रैक के जगह-जगह बाधित होने के चलते फिलहाल गोमुख जाने पर रोक लगा दी गई है। गंगोत्री गया आठ पर्यटकों का दल भोजवासा में रुका है।
चारधाम के साथ ही कैलास मानसरोवर यात्रा पर भी मौसम की मार पड़ी है। कैलास यात्रा मार्ग पर कुटी के पास निकुंज पुल बह गया। चार अन्य स्थानों पर भी पुल बह गए और दो किमी सड़क क्षतिग्रस्त हुई है। इसके चलते कैलास यात्रा से लौट रहे पांचवें दल के श्रद्धालु रास्तों में फंसे हुए हैं। यह मार्ग पिछले पांच दिन से बंद है। राज्य में 237 मोटर मार्ग बंद हैं, इनमें 205 ग्रामीण क्षेत्रों के मार्ग हैं।

नदी-नालों के उफान ने सांसें अटकाई हुई हैं। कुमाऊं में हल्द्वानी से चोरगलिया क्षेत्र में भारी बारिश के कारण उफान पर आए सूर्यानाला को पार करते वक्त 35 यात्रियों से भरी बस बह गई। पुलिस और प्रशासन की रेसक्यू टीम ने स्थानीय लोगों की मदद से यात्रियों को सुरक्षित निकालने में कामयाबी पाई। हादसे में तीन यात्री घायल हो गए, जिनमें से सितारगंज निवासी हसीन बानो नामक एक महिला ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। दो घायलों का उपचार चल रहा है। गौला नदी का जल स्तर बढ़ने से गौला बैराज के सभी गेट खोलने पड़े, जिससे इलाके में दहशत रही।
पढ़ें:-उत्तराखंड में मौसम विभाग की चेतावनी, अगले 72 घंटे होगी भारी बारिश
हरिद्वार में सोलानी नदी उफान पर है, जिससे घाड़ क्षेत्र के लोगों को मुश्किलों से दो-चार होना पड़ रहा है। अतिवृष्टि से टिहरी के जाखणीधार में एक घर की छत ढह गई, जबकि देहरादून में सिल्ला में भूस्खलन से एक घर क्षतिग्रस्त हो गया। उत्तरकाशी की बड़कोट तहसील में एक प्राथमिक स्कूल का भवन ध्वस्त हो गया।

पढ़ें:-पूरे उत्तराखंड में हो रही बारिश, बदरीनाथ हाईवे बंद
उत्तराखंड में मानसून की रफ्तार अभी बनी रहेगी। दो दिन से लगातार चल रही बारिश का क्रम आगे भी बना रहेगा। राज्य मौसम केंद्र के निदेशक विक्रम सिंह के अनुसार आगामी दिनों में राज्य में अनेक स्थानों पर मध्यम वर्षा से लेकर गरज के साथ जोरदार बौछारें पड़ सकती हैं। कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी वर्षा की भी संभावना है। इसे देखते हुए सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।

पढ़ें-बारिश के दौरान इस स्कूल में हुई पत्थरों की बरसात

Edited By: sunil negi