दर्शन सिंह, फिरोजपुर

एकतरफ सरकार गांवों के प्राइमरी स्कूलों को स्मार्ट का दर्जा देकर उनकी कायाकल्प करने के दावे कर रही है। दूसरी ओर कोरोना महामारी से पहले जिस गांव सोढ़े वाला के सेल्फ स्मार्ट प्राइमरी स्कूल में बच्चों को स्वच्छता का पाठ पढ़ाया जाता रहा है वह अब गोबर के ढेरों में घिरा नजर आ रहा है। शहर से करीब दो किलोमीटर दूर इस स्कूल का मुख्य गेट के पास ही गंदगी फेंकी जा रही है।

खास बात यह भी है कि दर्जनों गांवों के साथ-साथ अमृतसर को जाने वाली इस रोड से नेताओं से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों का आना जाना रहता है। लेकिन किसी ने भी स्थिति को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई। स्कूल की दीवार भी गिर चुकी है और उसे बनाने में कोई गंभीरता प्रबंधक नहीं दिखा रहे। लोग गिरी दीवार के साथ जो गंदगी फेंक रहे वे स्कूल के भीतर पहुंच चुकी है।

बताया जाता है कि गांव के युवाओं ने मिलकर स्कूल के आसपास फेंकी गंदगी के खिलाफ आवाज उठाई थी लेकिन कार्रवाई करने को दरकिनार कर दिया गया। वे युवा पूर्व डिप्टी कमिश्नर को भी मिले थे और समस्या के बारे में जानकारी दी थी।

-------------------

स्कूल के आसपास गंदगी फेंकने को लेकर कई बार ग्रामीणों को रोका है। लेकिन उनकी बात मानने को कोई तैयार नहीं है। -सुखदेव सिंह, सरपंच ------------------- स्कूल की समस्या व हालात के बारे में जानकारी नहीं है। अगर ऐसी स्थिति बनी हुई है तो खुद स्कूल जाऊंगा व समस्या का हल करवाएंगे। शिक्षा के मंदिर के बाहर गंदगी फैलाना अति निंदनीय काम है। --राजीव छाबड़ा, डीईओ

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस