पटना। पटना थिएटर फेस्टिवल के पहले दिन गुरुवार को कालिदास रंगालय में सुमन कुमार निर्देशित नाटक कॉकटेल का मंचन किया गया। इसके नाट्यकार अनिल कुमार मुखर्जी थे। नाटक में दिखाया गया कि किस तरह से वर्ष 1947 में सोनार बांग्ला पूर्वी बंगाल, भारत की पृष्ठभूमि से अलग हो गया। हजारों की संख्या में नर-नारी अपने घर को छोड़कर भारत के लिए रवाना हुए। उन्हें उम्मीद थी कि भारत पहुंचते ही उनकी सारी समस्याएं खत्म हो जाएंगी और वे मुक्ति की सांस ले सकेंगे। वे आए और शरणार्थी के नाम से कलंकित होते रहे। एक सुंदर नवयौवन सीमा पारकर शरणार्थी के रूप में भारत में इसलिए आई थी कि यहां उसे सम्मान के साथ जीने का अवसर मिलेगा, परंतु उसे एक धनी व्यवसायी की रखैल बनकर जीवन की मर्यादा मिली। नाटक में सुनीता भारती, सचिन मिश्रा, सोनू कुमार, प्रवीण कुमार, विष्णुदेव कुमार, विकास मिश्रा और नंदलाल सिंह ने शानदार अभिनय किया।

मृदुभावों के प्रभावशाली कवि थे विशुद्धानंद

पटना। 'एक नदी मेरा जीवन' लिखने वाले दर्द के कवि पं. विशुद्धानंद का जीवन पर्वत की घाटियों से होकर अनेक वन-प्रांतों की भूमि से गुजरती बहती नदी सी थी। संघर्षो ने उन्हें शक्ति दी और एकांतिक साधना ने संजीवनी। बिहार हिदी साहित्य सम्मेलन में गुरुवार को ये बातें कवि की जयंती पर सुनने को मिला। अध्यक्षता करते हुए सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ. अनिल सुलभ ने कहा कि कवि मृदुभावों के अत्यंत प्रभावशाली और यशस्वी कवि थे। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन साहित्य और संस्कृति को दिया। पाटलिपुत्र की महान विरासत पर लिखी गई उनकी धारावाहिक 'पाटलिपुत्र में बदलती हवा' काफी लोकप्रिय रहा। जयंती पर कवि-गीतकार जयप्रकाश पुजारी को कवि विशुद्धानंद स्मृति सम्मान से अलंकृत किया गया। अध्यक्ष डॉ. शंकर प्रसाद, डॉ. धु्रव कुमार, कुमार अनुपम, कवि के पुत्र प्रवीर कुमार आदि ने विचार दिए। जयंती पर कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें शहर के साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं को पेश कर सभी का दिल जीता।

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