हरिश्चंद्र श्रीवास्तव, (सुलतानपुर) : ग्रामीणांचल में स्थित श्मशान घाटों का कोई पुरसाहाल नहीं है। शव के साथ अंतिम यात्रा में आने वाले लोग कदम-कदम पर समस्याएं झेलते हैं। बस किसी तरह शव का दाह-संस्कार हो जाए और वे वहां से रुखसत हो सकें। घाटों की स्थिति को देखकर कोई दो मिनट भी यहां गुजारना नहीं चाहता है।

गोमती नदी के किनारे स्थित इब्राहिम श्मशान घाट जिले के अंतिम छोर पर स्थित है। दरअसल, यहां पर जिले के ही नहीं बल्कि जौनपुर व प्रतापगढ़ के लोग भी दाह संस्कार करने के लिए आते हैं। इसके बावजूद न तो जनप्रतिनिधि और न ही प्रशासन के अधिकारी इस ओर ध्यान दे रहे हैं।

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जर्जर टिन शेड, दीवार धंसी :

दो वर्ष पूर्व बरसात में दीवार ढह गई थी, जिसकी मरम्मत नहीं कराई गई और वहां पर आसपास अब गड्ढा हो गया है। टिन शेड इस कदर जर्जर हो चुका है कि वह कभी भी धराशायी हो सकता है, जिसके चलते लोग वहां बैठते ही नहीं हैं।

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पांच वर्ष पूर्व हुआ था निर्माण :

अंत्येष्टि स्थल का निर्माण पांच वर्ष पूर्व 24 लाख 12 हजार रुपये की लागत से कराया गया था। उस समय लोगों ने घटिया निर्माण की शिकायत की थी। लेकिन, किसी ने ध्यान नहीं दिया। अब स्थिति यह है कि बस किसी तरह यहां शवों का अंतिम संस्कार किया जाता है।

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बरसात के समय होती हैं सबसे ज्यादा मुश्किलें :

शवदाह स्थल की फर्श बैठ जाने से वहां केवल मिट्टी ही दिखती है, जिससे बरसात के दिनों में नमी अधिक होने के चलते शव को जलाने में करीब चार से पांच घंटे का समय लग जाता है। सीढि़यां भी क्षतिग्रस्त हालत में हैं, जिससे लोग नदी का पानी लेना मुनासिब नहीं समझते हैं। सकरदे, कटघरपुरे चौहान, देवराजपुर, प्रतापुर, बूढ़ापुर समेत प्रतापगढ़ और जौनपुर जिले के नजदी गांव के लोग यहां अंतिम संस्कार करने आते हैं। श्मशान घाट की दुर्दशा को देखकर लोग प्रशासनिक व्यवस्था को कोसते हुए लौटते हैं।

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अंत्येष्टि स्थल के निर्माण के लिए शासन को पत्र लिखा गया है। बजट निर्गत होते ही श्मशान घाट की समस्याओं को दूर कर निर्माण कार्य कराया जाएगा।

- आलोक कुमार सिह, खंड विकास अधिकारी

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